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मंच के संस्मरण
सौ सवा सौ साल पहले हाथरस में कविता की खेती पटाक-तख़ल्लुस यानी उपनामोपनाम ममता से भयभीत बलवीर सिंह ‘रंग’ शरद जोशी और जीप पर सवार खिल्लिया शरद जोशी : पानी में तेल की बूंद तालियों के बीच पसरा सन्नाटा इस वास्ते अनुरोध है गरमी सरदी बारिश ओले टोटके और उनके घोटके पहले बा से पहले खा तक कवि अनंत कवि-कष्ट अनंता धूमिल ने पूछा भूख क्या होती है क्या होती है थेथरई मलाई मोह में भंग और भंग में मोह चलता है पर इतना नहीं चलता तीन तरह की बत्तीसी नीरज माने सखाभाव की साख एक होता है शब्द, एक होती है परंपरा अर्थ रस के व्यभिचारी भाव खाटू के बाबा, काले नाग से बचाना खेल एलपीएम और सीपीएम का सन् बयासी की उड़ान बया-सी ढिंचिक-ढिंचिक वाली रामचरित-मानस अंतिम विदाई हो तो ऐसी बच्चन जी ने क्या ख़ूब रचा भवानी दादा बोले-मज़ा आ गया अंतिम विदाई हो तो ऐसी बच्चन जी ने क्या ख़ूब रचा
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