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  • धोबी का कुत्ता घर का न घाट का – podcast episode 3
  • धोबी का कुत्ता घर का न घाट का – podcast episode 3

    मुहावरे न हों हमारी ज़िन्दगी में तो कहने वालों को आसानी न हो। जरा सी बात बड़ी हो जाती है और बड़ी सी बात को जरा सी बात में कह दिया जाता है। मेरी छोटी सी कविता में एक शब्द का भी इस्तेमाल किया है मैंने जिसके दो अर्थ हैं और जब ऐसा होता है तो कहते हैं कि श्लेष अलंकार होता है। अब अलंकार वलंकार में मत जाइए, ये देखिए कि घर पर धोबी के कुत्ते के साथ में क्या होता है और घाट पर क्या होता है…..।

    wonderful comments!

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