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    घूमते-घूमते लुढ़क गया पेपरवेट

    (प्रेमविहीन कामनाएं मुंह के बल गिरती हैं)

     

     

    स्टैनो की नौकरी के लिए

    अनेक कन्याएं बैठी थीं

    ऑफ़िस की गैलरी में।

     

    अंदर आई एक कन्या से

    बॉस ने पूछा—

    पर मंथ

    कितना रुपया लोगी

    सैलरी में?

     

    एड़ियों पर उचक कर

    कन्या बोली हिचक कर—

    सर

    बीस हज़ार रुपया लेगी हम।

     

    बॉस बोला—

    नो प्रॉब्लम!

    बीस हज़ार रुपया हम देगा,

    हां, बीस हज़ार रुपया तुमकू

    मज़े के साथ मिलेगा।

     

    बॉस ने पेपरवेट

    और आंखों को नचाते हुए,

    फिर अचानक अपनी हथेली पर

    बीस हज़ार की संख्या

    मेंहदी की तरह रचाते हुए,

    दोहराया—

    बीस हज़ार…. मज़े के साथ

    समझ में आया?

     

    ‘मज़े के साथ’ वाली बात

    देखकर और सुनकर,

    स्टैनो निकल गई

    बॉस की हसरतों को धुनकर।

     

    हो नहीं पाया आखेट,

    घूमते-घूमते लुढ़क गया

    पेपरवेट।

    wonderful comments!

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