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  • धरती की धुरी की चिंता
  • धरती की धुरी की चिंता

    Osama Bin Laden—चौं रे चम्पू! लादेन के दिन लद गए। समन्दर में दफन कियौ, जे  बात सच्ची ऐ का?

    —सच-झूठ का मुझे क्या पता। अमरीका ने सोच-समझ कर ही कहा होगा। कफ़न-दफ़न का मामला बड़ा नाजुक होता है। मिट्टी से कोई क्या दुश्मनी निकालेगा। पांच तत्व का बना शरीर होता है, बाद में उसे प्रवाहित करो, जलाओ, दफ़नाओ, गिद्धों को सौंप दो या अस्पताल को दान कर दो, क्या अंतर पड़ता है। जहां तक समन्दर में दफ़नाने की बात है, दाद देनी पड़ेगी अमरीका के दिमाग़ को।

    —कैसै लल्ला?

    —अरे, मार गिराया। हैलिकोप्टर में चढ़ाया। अफ़गानिस्तान के रस्ते, सस्ते में कहां निपटाया, ये तो अमरीकी सैनिक जानें या उनके आका, लेकिन दस साल तक उसका कर नहीं पाए बाल भी बांका। चचा! आतंकवाद को जन्म देने वाले रोगाणु भी अमरीका से आते हैं और फिर जब वायरस भयंकर हो जाता है तो उसके निपटाने के तरीक़े भी वही ईजाद करता हैं। जब दो टावर गिरी थीं, तो जैसे टावर बैठीं, ऐसे ही इंसानियत का दिल भी बैठ गया था। भला हो अमरीका के मीडिया का कि उसने अपने किसी भी चैनल पर लाशें नहीं दिखाईं। लाशें देख कर उत्तेजना व्याप्त होती है, दहशत और बढ़ती है या हिंसक दिमागों को सुकून मिलता है। हमारा मीडिया लादेन का नकली फोटो दिखाता रहा।

    —अमरीका की भली चलाई! सद्दाम की फाँसी दिखाई कै नायं? तू समंदर की बात कर!

    —ओबामा पैदा हुआ रेगिस्तान में, रहता था पहाड़ों के बियाबान में, हमले करता था आसमान में, दफनाया गया समंदर के सुनसान में। समुद्र में दफ़नाने का विचार इसलिए अच्छा है कि एक तो मुस्लिम रीति-रिवाज के मुताबिक़ कारज हुआ और कोई पता भी नहीं लगा सकेगा कि है कहां। पाकिस्तान में कहीं दफ़नाते तो आतंकानुयायी बना देते मज़ार। हर दिन दर्शनार्थी आते हज़ारों हज़ार। वैसे, मुझे नहीं लगता कि समुद्र में दफ़नाया गया होगा। हो सकता है बहुत ऊंची शोध करने वाले लोगों को उसका दिमाग़ दे दिया गया हो ये पता लगाने के लिए कि इसमें विस्फोटक निर्माण परियोजनाएं कहां हैं? खोपड़ी की मल्टी-स्कैनिंग कराई गई हो। वे कौनसे तत्व हैं जो मानव-संहार के लिए लालायित रहते हैं। वे कौन से तत्व हैं जो इंसान को इंसान नहीं समझते। वे कौन से तत्व हैं जो धर्म को दिमाग़ में एक ग्रंथि बना देते हैं और मौहब्बत से दूर कर देते हैं इंसान को। इतनी आसानी से समन्दर में दफ़न नहीं किया होगा चचा। संकट तो अब पाकिस्तान पर आएगा। अवाम का सवाल होगा कि हमारे घर में आकर दूसरे देश के लोग हमला कैसे कर गए? सहमति थी तो अवाम से क्यों नहीं ली? उग्रवाद के ज़रासीम पाकिस्तान में जहां-जहां भी हैं वे कुलबुला रहे होंगे। अमरीका के प्रति इस्लामपंथियों की नफरत के सैलाब को कैसे रोकेगा पाकिस्तान? डरे हुए हैं हुक्मरान, कहीं सत्ता ही समन्दर में दफ़न न हो जाए। बहरहाल, पाकिस्तान में माहौल है मातम का और अमरीका में जश्न का। उत्तर मिल गया बहुत बड़े प्रश्न का।

    —कौन सौ उत्तर?

    —यही कि अमरीका ताक़त का अमीरिस्तान है और पाकिस्तान आतंक का पनाहिस्तान। ओसामा को पाकिस्तानी ठिकाने पर ठिकाने लगा देना ओबामा की बहुत बड़ी जीत है। भारत को न ख़ास ख़ुशी न ख़ास गम। मैंने सितंबर दो हज़ार एक में गलती से एक मिसरा कहा था, ‘लादेन मरे या बुश, हम दोनों में खुश’। तत्काल सुधार भी किया, ‘लादेन मरे ना बुश, हो दोनों पर अंकुश’। आतंकवाद किसी एक को मार देने से नहीं मरेगा। दिलो-दिमाग़ पर अंकुश लगाने से जाएगा, पर मुझे तो चिंता धरती की धुरी की है।

    —सो चिंता कैसी रे?

    —अरे, समन्दर की अतल गहराई में दफ़न हुआ है। धरती के केन्द्र के करीब पहुंच गया न!  शक्तिशाली चुम्बकीय परिधि, नाभिकीय विकीरण, टैरर के रैडिएशन का कल्मीनेशन ओसामा का दिमाग़। धरती की किल्ली को भी परेशानी होगी।

    —अरे धरती घूम रही ऐ सूरज के चारों लंग, धरती की धुरी सूरज और सूरज की धुरी जानै कौन, बैहतर ऐ मौन।

    wonderful comments!

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