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मुक्तिबोध की काव्य-प्रक्रिया समीक्षा

मुक्तिबोध जो कई कारणों से जीवन में उपेक्षित रहे, मरते ही लोगों के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण हो गए। अशोक चक्रधर की किताब पहला गंभीर प्रयास है मुक्तिबोध के विश्लेषण का। डॉ. शिवकुमार मिश्र लिखते हैं, ‘आलोचनात्मक विश्लेषण में लेखक ने विषय की गहराई में प्रवेश करने की अपनी क्षमता का परिचय देते हुए उपयोगी सारांश सामने रखा है। पुस्तक विचारोत्तेजक है। इसकी भाषा सुंदर और शैली रोचक है। मुझे विश्वास है अपने विषय पर यह पुस्तक पायनियर मानी जाएगी।’ मुक्तिबोध मार्क्सवादी थे। मार्क्सवाद के बुनियादी तथ्यों को स्वीकार कर लेने के बाद मुक्तिबोध की कविता की गहनता समझ में आ सकती है। अशोक चक्रधर ने मार्क्सवादी संदर्भ में मुक्तिबोध की रचना-प्रक्रिया का विश्लेषण बहुत सफलतापूर्वक किया है।

मुक्तिबोध जो कई कारणों से जीवन में उपेक्षित रहे, मरते ही लोगों के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण हो गए। अशोक चक्रधर की किताब पहला गंभीर प्रयास है मुक्तिबोध के विश्लेषण का। डॉ. शिवकुमार मिश्र लिखते हैं, 'आलोचनात्मक विश्लेषण में लेखक ने विषय की गहराई में प्रवेश करने की अपनी क्षमता का परिचय देते हुए उपयोगी सारांश सामने रखा है।..."