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कविता का अनुवाद कविता में करना आसान नहीं होता। ख़ास कर तब जब तुकों के विधान का भी निर्वाह किया जाए। छंद के विधान को माना जाए। इन काव्यानुवाद में मौलिक काव्य-सा आनंद आएगा। पढ़िए तो सही! काव्यानुवाद का उनका ताज़ा काम है कपिल सिब्बल की ‘आई विटनेस’ पुस्तक का ‘किस-किस की जय हो’। कपिल जी स्वयं कहते हैं कि कुछ कविताओं का अनुवाद तो मूल से भी अच्छा बन पड़ा है। कविता के अनुवाद में कुछ छूट लेनी पड़ती है, कपिल जी ने यह छूट दी। तो कविताएं और निखर आईं।