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हर कवि की रचना यात्रा में अनेक पड़ाव आते हैं। अशोक जी सात वर्ष की उम्र से कविता लिखते आ रहे हैं। दूर्भाग्य है कि उनकी बाल्यावस्था की कविताओं का कोई छपित रिकार्ड हमारे पास नहीं है। कहीं न कहीं मिलेगा जरूर, उसे भी दिया जायेगा। लेकिन सन 70 के बाद उन्होंने जो लिखा वह प्राय: उपलब्ध हैं। उनकी प्रारंभिक कविताएं प्रगतिवादी चेतना की कविताएं रहीं। पुन: जब कवि सम्मेलनों में उनकी वापसी हुई, 1975 के करीब तब वे अपनी कविताओं को संप्रेषण की शर्त के साथ लिखने लगे। उनका मानना है कविता वह जो समझ में आए, कान के ज़रिए दिल और दिमाग़ में प्रवेश करे। उन्होंने गीत भी रचे, उनके रचे हुए गीत धारावाहिकों और फिल्मों में प्रयुक्त हुए हैं। रेडियो नाटकों के मध्य भी गीत लेखन हुआ। लेकिन जिस शैली और अंदाज़ के लिए वे जाने जाते हैं वे सारे के सारे संकलन यहां मौजूद हैं। आपको जैसी कविता का रूप देखना हो, इन किताबों से आपको गुज़रना पड़ेगा। तब हो पाएंगे आप कवि की रचनाधर्मिता से परिचित।