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प्रौढ एवं नवसाक्षर साहित्य ऐसा क्षेत्र है जिसमें प्राय: रचनाकार, कवि, नहीं जाते हैं, उपेक्षित-सा क्षेत्र है जहां पुस्तकें तो मिलती हैं लेकिन कल्पनाशीलता और रचनाशीलता का उनमे पर्याप्त नहीं है। अशोक जी ने प्रौढ़ों के लिए जो भी लिखा मन से लिखा, देश की आवश्यकताओं को समझते हुए लिखा। और उपगोगी सिद्ध हुआ।