मुखपृष्ठ>परिचय>पुस्तकें>प्रौढ़ एवं नवसाक्षर साहित्य>हमने मुहिम चलाई
पुस्तकें
हमने मुहिम चलाई प्रौढ़ एवं नवसाक्षर साहित्य

ढाई आखर होते हैं प्रेम के, ये सभी को मालूम है। शिक्षा यदि प्रेम से दी जाय और प्रेम से ली जाए तो ज्ञान के सारे रास्ते आसान हो जाते हैं।

‘ढाई आखर’ नाम से, पांच भागों में विभक्त एक वीडियो फ़िल्म-श्रृंखला का निर्माण हुआ था, जिसे दूरदर्शन ने एक-एक घंटे की दो टेली-फ़िल्मों के रूप में प्रसारित किया। ये फ़िल्म विशेष रूप से साक्षरता के क्षेत्र में लगे हुए अध्यापकों के प्रशिक्षण को ध्यान में रखकर बनाई गई थीं, लेकिन आम दर्शकों को भी पसंद आईं। ग्रामीण अंचल के निरक्षरों एवं नवसाक्षरों ने इन्हें रुचिपूर्वक देखा। तभी विचार बना कि इन्हें पुस्तकमाला के रूप में प्रकाशित किया जाए। साक्षरता अभियान में लगे अध्यापक तो लाभान्वित हों ही, उनकी मदद से नवसाक्षर भी इन्हें पढ़ें और यह सोच-सोचकर मगन हों कि किन-किन पड़ावों से गुज़र कर उन्होंने साक्षरता पाई है।

सरला और चंदर शहर से टे्रनिंग लेकर गांव आए। वे चाहते हैं कि उनके गांव में निरक्षरता का अंधेरा न रहे। गांव मे एक प्रौढ़ केन्द्र खोलना उनकी मुहिम है। जादू से प्रकट होने वाले नट और नटी इस काम में उनकी मदद करते हैं। ‘ढाई आखर’ के पहले भाग- ‘हमने मुहिम चलाई’ की यही कहानी है।

ढाई आखर होते हैं प्रेम के, ये सभी को मालूम है। शिक्षा यदि प्रेम से दी जाय और प्रेम से ली जाए तो ज्ञान के सारे रास्ते आसान हो जाते हैं।..."