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    saaraa jahaan teraa hai

     

     

     

     

     

     

     

     

    सारा जहान तेरा है

    (एक साथ बोधन, संबोधन और उद्बोधन)

     

    तू गर दरिन्दा है

    तो ये मसान तेरा है,

    अगर परिन्दा है

    तो आसमान तेरा है।

     

    तबाहियां तो किसी और की

    तलाश में थीं,

    कहां पता था उन्हें

    ये मकान तेरा है।

     

    छलकने मत दे अभी

    अपने सब्र का प्याला,

    ये सब्र ही तो

    असल इम्तेहान तेरा है।

     

    न बोलना है तो मत बोल

    ये तेरी मरज़ी,

    तेरी चुप में भी

    मुकम्मल बयान तेरा है।

     

    हो चाहे कोई भी तू

    हो खड़ा सलीक़े से,

    ये फ़िल्मी गीत नहीं

    राष्ट्रगान तेरा है।

     

    तू अपने देश के दर्पण में

    ख़ुद को देख ज़रा,

    सरापा जिस्म ही

    देदीप्यमान तेरा है।

     

    हर एक शख़्स यहां का

    तेरा है, तेरा है,

    तेरा है क्योंकि दिलों पर

    निशान तेरा है।

     

    भुला दे अब तो भुला दे

    कि भूल किसकी थी!

    अशोक चक्रधर,

    सारा जहान तेरा है।

     

    wonderful comments!

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