मुखपृष्ठ>
  • खिली बत्तीसी
  • >
  • प्रेम कैसे हो आधा-आधा
  • प्रेम कैसे हो आधा-आधा

    प्रेम कैसे हो आधा-आधा

    (प्रेम पूर्ण देकर प्रतिदान में पूर्ण ही चाहता है)

    श्रीमान जी बोले—

    एक ग़ज़ल हुई है

    बहुत दिन के बाद।

    मैंने कहा— इरशाद, इरशाद!

     

    आती नहीं है उसके

    जीवन में कोई बाधा,

    राधा ही रुक्मिणी हो

    और रुक्मिणी हो राधा।

     

    जब पूर्ण दे रहा है

    तो पूर्ण तुमसे चाहे,

    कैसे भला हो पाए

    ये प्रेम आधा-आधा।

     

    प्रेमी जो साथ ना हो

    तो प्रेम साधना है,

    इस प्रेम साधना को

    मुश्किल था, जिसने साधा।

     

    नी सा भी ज़रूरी था

    आरोह में जो गाते,

    सरगम ठहर गई क्यों

    आया जहां पे पा धा।

     

    सुख के हज़ार कंधे

    सुख की हज़ार बांहें,

    दुख दफ़्न हो के सो जा

    मिलना न कोई कांधा।

     

    मैंने कहा—

    वाह!

    क्या टीस, क्या कराह!

    लेकिन बाधा, राधा

    आधा साधा

    और पा धा के बाद

    कांधा?

    ग़लत है काफ़िया!

    लेकिन मज़ा ला दिया।

     

    wonderful comments!

    Comments are closed.