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    लड़ाई का पहला क़दम

    (हम यदि सभ्य और प्रबुद्ध हैं तो युद्ध क्यों करते हैं)

     

     

    अब जब

    विश्वभर में सबके सब,

    सभ्य हैं, प्रबुद्ध हैं

    तो क्यों करते युद्ध हैं?

     

    कैसी विडंबना कि

    आधुनिक कहाते हैं,

    फिर भी देश लड़ते हैं

    लहू बहाते हैं।

     

    एक सैनिक दूसरे को

    बिना बात मारता है,

    इससे तो अच्छी

    समझौता वार्ता है।

     

    एक दूसरे के समक्ष,

    बैठ जाएं दोनों पक्ष।

    बातचीत से हल निकालें,

    युद्ध को टालें!

    क्यों श्रीमानजी,

    आपका क्या ख़याल है?

    श्रीमानजी बोले—

    यही तो मलाल है।

     

    दोनों पक्षों के पास

    अपने-अपने तर्क हैं,

    दोनों अपने हित में

    ज़रूरत से ज़्यादा सतर्क हैं।

     

    डिप्लोमैटिक भाषा

    डिप्लोमैट को खलेगी,

    बातचीत होगी

    पर हर बार टलेगी,

     

    बातचीत से कुछ होगा

    आपका भरम है,

    दरअसल, ये बातचीत ही तो

    लड़ाई का पहला क़दम है।

    wonderful comments!

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