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  • खगोलकुंडा का कोहिनूर

    —चौं रे चम्पू! कोहिनूर पै सरकार की और सुप्रीम कोर्ट की राय अलग-अलग चौं है गईं?

    —चचा, सरकार बाहर से शासन देखती है और कोर्ट अंदर से। शायद सरकार नहीं चाहती, क्योंकि कोहिनूर से भाग्य और दुर्भाग्य की कहानियां जुड़ी हुई हैं। इसे रखने वाले पुरुष शासक नेस्तनाबूद हो गए, जबकि महिलाओं ने भरपूर शासन किए। बला दूर ही भली। आ गया, तो कहीं ले न जाय विपक्षी लली। सुप्रीम कोर्ट संभावना की खिड़की खुली रखना चाहता है। चचा, एक सौ आठ कैरेट के हीरे के एक सौ आठ टुकड़े कर दो तो क्या रह जाएगा उनका मोल? और ऐसे भी कोहिनूर कैसे अनमोल? एक कोहिनूर हीरे की देनदारी तो दस-बीस माल्याओं पर है। ब्रिटेन से कुछ माल्यामालों को ले आओ बस। वैसे चचा, हम सबके पास एक-एक कोहिनूर हीरा है।

    —अच्छा जी! कौन सौ कोहिनूर?

    —कोहिनूर का अर्थ है रौशनी का पहाड़, हमारा कोहिनूर अचेतन में अंधेरे का पहाड़ है। कोहिनूर हीरा गोलकुंडा से निकला था। हमारा कोहिनूर हमारे सुप्रीम कोर्ट मस्तिष्क के खगोलकुंडा में रहता है। यह भी कहा जाता है कि द्वापर में इसका नाम स्यमंतक मणि था जिसे जामवंत से कृष्ण जी ने पाया था, और हमारे पास जो कोहिनूर है, वह स्वयमंतक है। अगर लोग जाम पीकर जामवंत हो जाएं तो यह स्वयमंतक स्वयं अंत करने के लिए ऊपर आ जाता है। आधुनिक काल में, सन इतने सौ इतने में …..

    —इतने सौ इतने का भए? सन बता!

    —सन और कीमत गूगल पर देख लेना। मैं आंकड़े नहीं देखता। कांकड़े यानी, कांटे और कंकड़ देखता हूं। तो मैं आपको बता रहा था कि क़्वीन एलिजाबेथ द्वितीय को प्रधानमंत्री बेंजामिन डिज़राएली ने राज्याभिषेक के समय दिया अथवा दिलवाया था। हमारा कोहिनूर एंग्ज़ामिन डिज़ायरली द्वारा आता है। जब आप अपनी डिज़ायर से अपनी एंग्ज़ाइटी, यानी, उत्तेजना और क्रोध को बाहर लाते हो, आवेश में आते हो, तो आपका कोहिनूर बाहर निकलकर, खंड-खंड होकर कौड़ी का रह जाता है। हमारा कोहिनूर है हमारा मूल्यवान क्रोध। चार लाइन सुन लो— क्यों तू आवेग का ज़ख़ीरा है, हर समय आत्मा अधीरा है, क्रोध को व्यर्थ ख़र्च मत करना, क्रोध तो कोहिनूर हीरा है!

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