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  • हज़ार साल की गारंटी      
  • हज़ार साल की गारंटी      

     

     

     

    —चौं रे चंपू! तोय संगीत की सबते कमाल की रचना कौन सी लगै?

     

    —बीसवीं सदी जा रही थी और इक्कीसवीं आ रही थी, तब संगीतमयी एक पंक्ति बारम्बार दोहराई जा रही थी, ’मिले सुर मेरा तुम्हारा, तो सुर बने हमारा।’ जितनी बार सुनो, अच्छा लगता था। शब्द-शब्द बंधे हुए थे, सारे सुर सधे हुए थे, विभिन्न लय-तालों के साथ कमाल कर दिया था। चचा, देश में सुर के साथ दिल से दिल भी मिले रहें, तो समझो सुपर कमाल!

     

    —लय और ताल में का फरक ऐ?

     

    —सुर के साथ लय न हो तो संगीत हो ही नहीं सकता। लय द्रुत या विलंबित हो सकती है, लेकिन ताल में निश्चित गिनतियां होती हैं। जैसे छंद में निश्चित मात्राएं। सुर-लय के साथ ताल के आने से, संगीत सुगम और सम्प्रेषणीय होने लगता है। ’मिले सुर मेरा तुम्हारा’ के गठन में तीन तरह की तालें थीं, कहरवा, दीपचंदी और दादरा, लेकिन सम्पूर्णता में अद्भुत। चचा! सुरों के आरोह-अवरोह की लय, ताल के साथ जब हिचकोले खाती है, तो इन तीनों के कौम्बो से बात टॉप क्लास बन जाती है। अकेले शब्द इतना प्रभावित न कर पाते।

     

    —कोरी तुकबंदी ई रह जाते!

     

    —नहीं, ऐसा भी नहीं हैं। बात बेतुकी हो तभी तुकबंदी ख़राब है। संगीत अपना सहारा देकर तुकबंदी के अर्थों को तरह-तरह से बताता है। फिर सुर, लय, ताल के साथ शब्द जीवन का नियमन करने लगते हैं। जब सन दो हज़ार एक आया, तो नए मिलेनियम के स्वागत में मैंने प्रतिगीत के रूप में लिखा था, ‘मिले नियम मेरा तुम्हारा, तो मिलेनियम बने हमारा।’ देश में नियमों का नियम और क़ानूनों का क़ानून है संविधान। नियम ग़लत हैं तो नियमों से नियमों को बदलो। सारे मनुष्य समान हैं, सारे देशवासियों के लिए नियम एक जैसे हों। जनता के निर्णयों से अब परिवर्तन आ रहे हैं। ’मिले सुर मेरा तुम्हारा’ के साथ ’मिले नियम मेरा तुम्हारा’ भी हो जाए तो पूरे एक हज़ार साल की गारंटी लेता हूं चचा! भारतवर्ष का उत्कर्ष उत्तरोत्तर बढ़ता जाएगा। बस, जीवन-संगीत में सुर, लय, ताल, के साथ नियम भी मिला लो।

     

    —जय हो, लल्ला!

     

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