मुखपृष्ठ>
  • चौं रे चम्पू
  • >
  • धरोहरों का उपयोग
  • धरोहरों का उपयोग

     

     

    —चौं रे चम्पू! इलाहाबाद में कौन-कौन मिले?

     

    —कहां तक गिनाऊं? स्टेशन पर उतरते ही मिले डॉ. युगांतर और डॉ. नीरज त्रिपाठी। युगांतर आयोजक होने के नाते आए थे और नीरज मोहब्बत में। दोपहर का भोजन कराया प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन डॉ. प्रकाश खेतान ने। उनका नाम गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में है। उन्होंने एक आठवर्षीया बालिका के मस्तिष्क से आठ घंटे के ऑपरेशन के बाद तीन सौ गांठें निकाल दीं। बालिका स्वस्थ प्रसन्न है। वे तीन सौ गांठें इलाहाबाद के संग्रहालय में अजूबे की तरह सुरक्षित रखी गई हैं। युवा कवि श्लेष गौतम शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पार्क में ले गए। पार्क में शहीद आज़ाद की भव्य प्रतिमा है। उनको प्रणाम किया। उसी परिसर में संग्रहालय है। संग्रहालय के निदेशक राजेश पुरोहित से मिले। भारतीय कला में सौंदर्यशास्त्र के अध्येता पुरोहित जी, इन दिनों अमूल्य धरोहरों की पुख्ता सुरक्षा के आधुनिक प्रबंधन में लगे हैं। आज़ाद की प्रतिमा के हाथ में जो कोल्ट पिस्तौल है, वह अपने असली रूप में संग्रहालय में है।

     

    —तैंनै देखीं वो दिमाग की गांठ और पिस्तौल?

     

    —फ़ोटो में ही देखीं चचा! संग्रहालय बंद था। एक मिले डॉ. सिंह, जो भारतीय इतिहास और वनस्पतियों के औषधीय गुणों पर शोध कर रहे हैं। कॉफ़ी हाउस में अनेक युवा कवि और लेखक मिले। उनकी पुस्तकें भेंट में मिलीं। सैल्फ़ियां खिंच रही थीं तभी डॉ. नीरज त्रिपाठी का फोन आया कि वे होटल में प्रतीक्षा कर रहे हैं। दो घंटे बाद उन्हें सर्जरी करनी थी, उससे पहले ही मिलना था। ख़ैर जी दौड़े वहां से। उन्होंने साल भर पहले मेरी पांच पुस्तकें ख़रीदी थीं, उन पर हस्ताक्षर लेने थे उन्हें। एक ऑटोग्राफ़ बुक थी, जिसमें देश के महानतम दिवंगत साहित्यकारों और राजनेताओं के हस्ताक्षर थे। चचा, वे कवि नीरज के विकट प्रेमी हैं। मुश्किलों से उन्होंने ‘नई उमर की नई फसल’ की डीवीडी ’कारवां ग़ुज़र गया’ गीत के कारण कहीं से मंगवाई थी। डीवीडी पर नीरज जी ने उस ओर हस्ताक्षर कर दिए जिधर समतल और साफ़सुथरा दिखा। डीवीडी तो हस्ताक्षर से अमूल्य हो गई, पर अब चल नहीं सकती। आप धरोहरों के उपयोग के बारे में सोचिए। मैं चला!

     

    wonderful comments!

    प्रातिक्रिया दे

    Receive news updates via email from this site