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  • मूर्ख बनाने का मौसम

     

     

     

    —चौं रे चम्पू! आज कौन सौ दिना ऐ रे?

     

    —चचा, आज शनीचर है!

     

    —हट्ट! आज तौ बुद्ध ऐ, सनीचर कहां ते भयौ?

     

    —जब तुम्हें मालूम था तो पूछ क्यों रहे थे चचा? हमारे देश में यही सबसे बड़ी मुसीबत है कि जो चीज़ें लोगों को पहले से मालूम होती हैं, उन्हीं को दूसरों पूछते हैं।

    —चल ठीक ऐ! पर जे बता कै तैंनै बुद्ध कूं सनीचर चौं बतायौ?

    —आज एक अप्रैल है न! मैंने तो सिर्फ बुध का शनीचर किया है, आज शनीचर की कृपा से बड़े-बड़े बुद्धिमानों को उल्लू बनाया जा रहा है। इस चुनावी महामेले में एक दिन क्या, पिछला महीना, ये महीना और अगला महीना, तीन महीने तक मूर्ख बनाने का फुलटॉस आयोजन किया गया है। पार्टियां एक दूसरे को मूर्ख बना रही हैं। नेता अपने उम्मीदवारों को मूर्ख बना रहे हैं। सादा वर्दी में पुलिस चोरों को मूर्ख बना रही है। चोर वर्दी पहन कर पुलिस को मूर्ख बना रहे हैं। पुलिस की वर्दी जितनी इन दिनों बिक रही हैं उतनी किसी चुनाव के दौरान नहीं बिकीं।

    —बरदी पहन कै पतौ नांय का करिंगे बेदरदी!

    —कुछ भी कर सकते हैं। दनादन मूर्ख बनाओ महोत्‍सव चल रहा है। चुनाव में ये पहला मौका है जब विचारधाराएं तो अपने सिर में डालने के लिए तेल लेने गई हैं और जिस सिर को जो सूझ रहा है उसी के अनुसार दूसरों को तेल लगाने की जुगत में है। हमारे वामपंथी भाइयों ने कह दिया कि सरकार बनाने में कांग्रेस अगर चाहे तो हमारा साथ दे दे, हम उनकी सरकार में साथ नहीं देंगे। अब देखिए, ये हुई न ऊंची बात। साथ ले लेंगे पर देंगे नहीं।

    —मतलब मूरख बनामिंगे, बनिंगे नांय! पर लल्ला, मूरख बनाइबे वारे खुद मूरख बन जायौ करैं!

    —देखिए, वरुण भैया मूरख बन गए। नीचे से फूंक भरी कि कुछ नहीं होगा, कह दे बेटा, जो तुझे कहना है कह दे। जब उसने कह दिया तो शुरुआत में तो नेताओं ने उससे पल्ला झाड़ा कि जी हमारा क्या मतलब, ये तो कांग्रेस की नीति है, हम तो ऐसे बोलते ही नहीं। अब देखिए वही नेता पीछे से सपोर्ट कर रहे हैं। पीलीभीत की पुलिस को कैसा उल्लू बनाया। अचानक जेल के पास से प्रकट हुए वरुण गांधी। धारा एक सौ चौवालीस को भी मूर्ख बना दिया गया। कलराज मिश्र पता नहीं कौन सी सुरंग़ से उन्हें जेल तक ले आए। मूर्ख बनी पुलिस, मूर्ख बनी पब्लिक, जो जुटाई गई। फिर एक तरफ भीड़, दूसरी तरफ पुलिस का भाड़, जिसमें झौंकी गई जनता। मैया आई, मैया ने पता नहीं किसे मूर्ख बनाया— मेरा बेटा बड़ा बहादुर है, मुझे उस पर गर्व है। गर्व कर मैया, गर्व कर, बेटा ख़ूब नफ़रत फैलाए, हिंसा भड़काए, बहुत बढि़या। वरुण गांधी एक सप्ताह के अंदर-अंदर हीरो बने या विलन, इस देश में पता लगाना मुश्किल है। हीरो या विलन? जो इसका उत्‍तर दे वह मूर्ख, जो न दे वह महामूर्ख। चचा, भारत की भावुक महाभावुक यानी कि महामूर्ख जनता कहीं भी मत्‍था टेक देती है। आप देखिए, भगवानों की कोई कमी थी, जो हर दिन एक से एक हैंडसम और नौजवान भगवान पैदा हो रहे हैं। चैनल बड़े चैन से उन पर फूल बरसा रही हैं, उन पर पैसा लगा रही हैं और विज्ञापन पा रही हैं। राजनीति से तेज ग़ायब हो गया है चचा, तात्‍कालिक उत्तेजना बढ़ती जा रही है। लोग स्‍वयं को मूर्ख बना रहे हैं।

    —ठीक कह रह्यौ ऐ!

    —चचा बीजेपी की छोडो, औरों को भी देख लो। यूपीए के घटक दलों ने कांग्रेस को मूर्ख बनाया फिर कांग्रेस ने मूर्ख बनाया सहयोगी दलों को। ऐलान कर दिया कि हम तो पूरी यूपी में अपने कैंडीडेट उतारेंगे। लालू, पासवान और मुलायम, जो सत्ता के गलियारों में एक दूसरे को गरियाते थे अब गलयाते यानी गले मिलते दिखाई दे रहे हैं। तो चचा ये अप्रैल के महीने की पहली तारीख के लिए ही नहीं पूरे अप्रैल महीने के लिए मूर्ख बनाने का मौसम है। मौसम को एक्सटेंशन मिलता रहेगा।

    —इलाज का ऐ रे लल्‍ला?

    —इलाज भी मूर्ख बनाने से ही होगा। वोटर अगर मूर्ख बना दे इन सबको और समझा दे कि चूंकि हम समझदार हैं, इसलिए समझदार आदमी को ही संसद में भेजेंगे, तब बात बनेगी।

     

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