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  • देश कुर्सी-प्रधान

     

     

    —चौं रे चम्पू! चुनावी हवा कित मांऊ बह रई ऐ रे?

    —चचा,

     

    कुर्सी का कीड़ा

     

    नए सत्ता समीकरणों के बाद क्या होगा सरकार? उत्तर— मंत्रिमंडल-विस्तार। कॉकरोच से ज़्यादा जानदार होता है

    कुर्सी का कीड़ा, और यही होती है गठबंधन सरकार की पीड़ा! कुर्सी न पाने वाले घूमेंगे उखड़े-उखड़े, पहले भी हुए थे

    एक ही विभाग के दो-दो टुकड़े। मानव संसाधन से खेलकूद मंत्रालय अलगाया था, इस तरह एक कैबिनेट मंत्री बढ़ाया था। अब स्थिति पर पुनर्विचार किया जाएगा, दो का चार किया जाएगा। ये जो मंत्रालय है खेलकूद का

    यहां दो लोग मज़ा ले सकते हैं एक अमरूद का। एक बन सकता है खेल मंत्री, दूसरा कूद मंत्री। सारा का सारा काम लोकतंत्री!! वे बोले— डियर अशोक। इसी बात का तो है शोक। अपने काबीना में जितने मंत्री थे, आधे खेलमंत्री आधे कूदमंत्री थे। चलिए, तो फिर संसाधन से बनेंगे तीन मंत्रालय सन माने पुत्र-पुत्रित्त मंत्रालय साध माने इच्छा-चित्त मंत्रालय धन माने स्ववित्त मंत्रालय। परम आदरणीय! सत्ता का सुख बारंबार चखिए, पर मानव मंत्रालय अपने ही पास रखिए।

     

    कांकरिया मत मारो लंगर

     

    जोड़-तोड़ से जोड़ी-तोड़ी, बंदिश तोड़ी राग मरोड़ी— कांकरिया मत मारो लंगर गठबंधन की म्हारी डगर! सुन पावैं मोरे चट्टे- बट्टे छिपा-छिपा कर चाकू-कट्टे दौरे-दौरे इत आवैं मगर, गठबंधन की म्हारी डगर! कांकरिया मत मारो लंगर! थैली जननी, थैली मैया, थैली से ही निकले दैया, थैली में ही जावैं पसर। गठबंधन की म्हारी डगर! कांकरिया मत मारो लंगर! मतभेदों का भेद न रक्खें, सत्ता का सुख मिलकर चक्खें, कुर्सी के गुन गावैं अगर। गठबंधन की म्हारी डगर! कांकरिया मत मारो लंगर!! एग्ज़िट पोल पोल था प्यारे, मत टपका रे आंसू खारे। सिर धुनि-धुनि पछतावैं सगर। गठबंधन की म्हारी डगर! कांकरिया मत मारो लंगर!!

     

    घनघोर घटाओं को घटाइए

     

    कितने में से कितना घटाएं कि उतना हो जाए जितने में से उतना घटाने पर जितना होता है। लोकतंत्र में ये जोड़-घटाना बड़ा फ़ितना होता है। वे जोड़ने के लिए घटा कर ही मानेंगे मित्रों को घाट पर ही पाट देंगे शत्रुओं को पटा कर ही मानेंगे और उन्होंने तो क़सम खाई थी उनको हटाकर ही मानेंगे। कांग्रेस की क़समµ भाजपा को हटाएगी भाजपा की क़समµ कांग्रेस को मिटाएगी सपा ने चाहा बसपा को हटाना सबने चाहा बस पाना। बहरहाल, सब कुछ हो चुका अब घिरी हुई घनघोर घटाओं को घटाइए जो हुआ सो हुआ आगे बढिए हटाइए!

     

     

    wonderful comments!