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रात अौर दिन की अांख मिचोली – podcast episode 19

रात अौर दिन की अांख मिचोली – podcast episode 19

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नारी के सवाल अनाड़ी के जवाब 4 – podcast episode 18

नारी के सवाल अनाड़ी के जवाब 4 – podcast episode 18

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नारी के सवाल अनाड़ी के जवाब 3 – podcast episode 17

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नारी के सवाल अनाड़ी के जवाब 2 – podcast episode 16

नारी के सवाल अनाड़ी के जवाब 2 – podcast episode 16

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नारी के सवाल अनाड़ी के जवाब 1 – podcast episode 15

नारी के सवाल अनाड़ी के जवाब 1 – podcast episode 15

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दोस्त तुमने देर कर दी – podcast episode 14

दोस्त तुमने देर कर दी – podcast episode 14

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ग्लोबल वार्मिंग की हिंदी – podcast episode 13

ग्लोबल वार्मिंग की हिंदी – podcast episode 13

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वेदना में नहीं संवेदना में कमी – podcast episode 12

वेदना में नहीं संवेदना में कमी – podcast episode 12

एक बात रह-रह कर ज़ेहन में उठती है कि हमारे देश में वेदना में कमी आई है या संवेदना में। संवेदना तो कभी मरती नहीं है, ऐसा हम समझते हैं। कई बार ऐसा होता है कि संवेदना के स्रोतों के ऊपर यथार्थ के पत्थर रख दिए जाते हैं। ढंक दिया जाता है संवेदना को। संवेदना…


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सूर्यग्रहण, चन्द्रग्रहण और पाणिग्रहण – podcast episode 11

सूर्यग्रहण, चन्द्रग्रहण और पाणिग्रहण – podcast episode 11

दोस्तो, प्रणाम स्वीकार करो और एक बात की ओर ध्यान धरो! ग्रहण अच्छा भी होता है और ग्रहण बुरा भी हो सकता है। जो बुरा होता है उसके अन्दर अच्छाई हो सकती है, जो अच्छा लगता है उसके अन्दर बुराई हो सकती है, लेकिन मैं उलझाने वाली बात करने की बजाय सीधी-सरल बात रखना पसन्द…


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नदी है, लदी है, बदी है जाने क्या? – podcast episode 10

नदी है, लदी है, बदी है जाने क्या? – podcast episode 10

कवि जब कविता बनाता है तो अपनी निगाह तीन सौ साठ डिग्री घुमाता है। अपनी धुरी पर खड़े-खड़े घूमता है, देखता है। जो देखता है उसको अन्दर ले जाता है और अन्दर जो कुछ होता है उसमें घुला-मिला कर उसको फिर से बाहर लाने की कोशिश करता है। कई बार स्वयं भ्रम में पड़ जाता…


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