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खिली बत्तीसी

दैनिक भास्कर के सम्पादकीय पृष्ठ पर सोमवार से बुधवार

नन्ही सचाई और बुनियादी सवाल

नन्ही सचाई और बुनियादी सवाल

नन्ही सचाई और बुनियादी सवाल (बच्चों के पास भोले प्रश्न होते हैं और मर्मांतक प्रश्न)   श्रीमानजी बोले— एक डॉक्टर मित्र हमारे, स्वर्ग सिधारे। असमय मर गए, सांत्वना देने हम उनके घर गए।   उनकी नन्ही-सी बिटिया भोली-नादान थी, जीवन-मृत्यु से अनजान थी। हमेशा की तरह द्वार पर आई, देखकर मुस्कुराई।   उसकी नन्ही सचाई दिल को लगी बेधने, बोली— अंकल! भगवान जी बीमार हैं न पापा…


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सच्चे यही शिवाले हैं

सच्चे यही शिवाले हैं

सच्चे यही शिवाले हैं (वृक्ष सचमुच शंकर भगवान के अनुयायी लगते हैं)   तरह-तरह के फल पाए जो वो समझो इनके वरदान, निर्धन का घर बन जाते हैं छत करते हैं मुफ़्त प्रदान। थके पथिक को छाया देते नहीं किराया लेते हैं, कृपा लुटाते सदा वृक्ष ऐसे जैसे शंकर भगवान।   जहां खड़े हैं, वहीं खड़े हैं क्या तुलना इनके तप की,…


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वृक्ष हुए शंकर जी कैसे

वृक्ष हुए शंकर जी कैसे

वृक्ष हुए शंकर जी कैसे (यह सही समय है जब वृक्षारोपण होना चाहिए)   धरती सुखी रहे इस नाते किया जिन्होंने विष का पान, बुरा चाहने वालों को भी देते आए जीवन दान। ऐसे कौन देवता अपने प्रियवर ज़रा बताओ तो, श्रीमान जी बोले— वे महादेव शंकर भगवान!   शंकर के समान ही करते वृक्षों का हम जन पूजन, वृक्ष हुए शंकर जी कैसे बतलाएं…


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कागज़ों को फ़ाइलें पंसद हैं

कागज़ों को फ़ाइलें पंसद हैं

कागज़ों को फ़ाइलें पंसद हैं (मतदाता और मतपाता सबकी हक़ीक़त सामने है) फ़ाइल से निकलकर कागज़ कहां गया? उत्तर मिला— दूसरी फ़ाइल में। —फिर —तीसरी फ़ाइल में। —वहां से? —अगली में। —अगली से? —और अगली में! वाह! क्या ‘अगली’ सीन है, कागज़ सिर्फ़ फ़ाइलों का शौकीन है।   पूरे एक साल बाद अब तीन सौ पैंसठवीं फ़ाइल में बंद है, फ़ाइलों से…


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चूहा बिल्ली चिड़िया कुत्ता गाथा

चूहा बिल्ली चिड़िया कुत्ता गाथा

चूहा बिल्ली चिड़िया कुत्ता गाथा (मतदाता और मतपाता सबकी हक़ीक़त सामने है)     एक चुहिया दौड़ी-दौड़ी बिल में आई, चूहों के सामने चिल्लाई—   ऊपर दो बिल्लियां बातें कर रही हैं, रामनामी ओढक़र सबसे मुलाक़ातें कर रही हैं। सारे नाख़ून कटाकर आई हैं, पड़ोस के चूहों को पटाकर आई हैं। कहती हैं— हमारी अनऔथराइज़्ड चूहा कॉलोनी बिल नंबर दो को भी पास कर दिया…


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आगे का कल देख

आगे का कल देख

आगे का कल देख (दुख रुलाता है तो हंसा भी सकता है)   हिलता परदा देख कर करवाई जब शोध, मिला-विला कुछ भी नहीं हुआ हवा का बोध।   कठिन दौर में याद रख दो हैं बड़े निदान, चुप्पी थोड़े वक़्त की अधरों पर मुस्कान।   अरे कलंकी चन्द्रमा घट-बढ़ पर कर ग़ौर, अभी अभी कुछ और है कल होगा कुछ और।   ओ ज़ख़्मी इस बात का बोध न तुझको होय, जो मरहम तू चाहता,…


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तू कर उस दर पे सजदा

तू कर उस दर पे सजदा

तू कर उस दर पे सजदा (जब रफ़ा-दफ़ा करना मुश्किल जान पड़े)   किसी से क्यों खफ़ा है? समय ही बेवफ़ा है।   ये हर कोई सोचता है, कहाँ उसका नफ़ा है।   बहुत बेकार सा अब, यहां हर फलसफ़ा है।   बहुत लूटा था जिसने, फंसा वो इस दफ़ा है।   इबारत मिट चुकीं सब, सफ़ा उसका सफ़ा है।…


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टूट गया काला चश्मा

टूट गया काला चश्मा

                टूट गया काला चश्मा (आख़िर ये काला चश्मा है कौन सी चीज़)   ख़र्चा बहुत ज़्यादा है! कुछ काम-धंधा भी करोगे? पिता बोले— या सिर्फ़ आवारागर्दी का इरादा है?   राजकुमार जेब में चश्मा टटोलता है रह-रह, नौकरी की जगह टके से जवाब की तरह।   मंदिर मस्जिद या गुरुद्वारा आता है वह तीनों जगह…


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राजकुमार का काला चश्मा

राजकुमार का काला चश्मा

                राजकुमार का काला चश्मा (कुत्सित सत्य आहत करें तो ये चश्मा राहत क्यों देता है?)   राजकुमार अपना काला चश्मा तब नहीं लगाता जब धूप का उजाला हो, तब नहीं लगाता जब किरणों में ज्वाला हो।   इनसे तो अपने चश्मे को बचाता है, ख़ास-ख़ास मौकों पर ही अपना काला चश्मा लगाता है।   भिखारी को भीख या…


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कोई तो बात है

कोई तो बात है

                कोई तो बात है (दुनिया में जितने मनुष्य हैं सबके पास दिल है, लेकिन…)   हरेक दिल में महकती कोई फुलवारी है।   हरेक दिल में सुलगती कोई चिंगारी है।   हरेक दिल में तड़पती कोई दिलदारी है।   हरेक दिल में चहकती कोई किलकारी है।   हरेक दिल में अदाएं हैं, अदाकारी है।   हरेक दिल में क़रारों की बेक़रारी है।   हरेक…


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