अशोक चक्रधर > Blog > खिली बत्तीसी (Page 2)

खिली बत्तीसी

दैनिक भास्कर के सम्पादकीय पृष्ठ पर सोमवार से बुधवार

राना था गेहूं का दाना

राना था गेहूं का दाना

राना था गेहूं का दाना (मस्तिष्क की मशीन में अजब-गजब गड़बड़ियां हो जाती हैं कभी-कभी)     हमारे एक दोस्त थे— रामलाल राना, ख़ुद को समझने लगे गेहूं का दाना।   जहां कहीं मुर्गा दिखे, डर जाएं— ये तो हमें खा लेगा, जीते जी मर जाएं। जहां कहीं बोरा दिखे घबराएं, बिदक जाएं— कोई इसमें हमें भर लेगा, बोरा बंद कर देगा। और आटे की चक्की…


Read More

बाई की चीख़ निकली भयानक

बाई की चीख़ निकली भयानक

बाई की चीख़ निकली भयानक (इंसान की चीख के कारण कुछ और भी हो सकते हैं)     एक दिन दुर्गा बाई, लाला की दुकान पर आई। पीछे-पीछे प्रविष्ट हुए, दो हट्टे-कट्टे बलिष्ठ मुए।   थोड़ी देर बाद अचानक, दुर्गा बाई की चीख़ निकली भयानक।   दुकान से भागे दोनों मुस्टंडे, बाज़ार के लोग दौड़े लेकर के डंडे। दबोच लिया दोनों बदमाशों को, नाकाम कर दिया उनके…


Read More

ये धुआं-सा कहां से उठता है!

ये धुआं-सा कहां से उठता है!

ये धुआं-सा कहां से उठता है! (मारिश उर्फ़ पुन्नू की याद में)   नया-नया ज़माना था ग़ज़लों के चलन का, हमने भी एल० पी० ख़रीदा था मेंहदी हसन का।   ग्रामो़फ़ोन लगाकर ड्राइंग-रूम में, ग़ज़लें सुना करते थे फ़ुल वॉल्यूम में। एक ग़ज़ल तो इस क़दर भाई, कि दिन में बीस बार लगाई— ‘देख तो दिल कि जां से उठता…


Read More

ढूंढो कि अब कहां है

ढूंढो कि अब कहां है

ढूंढो कि अब कहां है (हिटलर आया और अचानक ग़ायब हो गया) पहरेदारों के सिर फोड़ता हुआ….   यम के नियम पीछे छोड़ता हुआ….   इतिहास की चट्टानी पर्तों को तोड़ता हुआ….   पाताल की सुरंगों को मोड़ता हुआ….   हिटलर भाग छूटा नर्क की जेल से और सीधे हमारी दिल्ली में आ गया रेल से।   उतार फेंके उसने स्वास्तिक के निशान, छिपा दिया अपना शिरस्त्रान।  …


Read More

चीनू का स्वाभिमान जागा

चीनू का स्वाभिमान जागा

चीनू का स्वाभिमान जागा (बच्चे के अद्भुत तर्क उसके स्वाभिमान की रक्षा करते हैं) बहुत पुरानी बात है जब मित्रवर सुधीर तैलंग, अपने एक चित्र में भर रहे थे रंग।   तभी चंचल नटखटिया उनकी नन्ही चीनू बिटिया बोली— ले चलिए घुमाने।   सुधीर करने लगे बहाने। पर बिटिया के आगे एक नहीं चली, अड़ गई लली— पापा चलो चलो चलो! फौरन चलो चलो चलो!! बिलकुल अभी चलो…


Read More

आओ स्वाधीनता दिवस पर तुक मिलाएं!

आओ स्वाधीनता दिवस पर तुक मिलाएं!

आओ स्वाधीनता दिवस पर तुक मिलाएं! (तुक मिलानी है लेकिन बात बेतुकी नहीं बतानी है) चलिए तुक मिलाइए, बात को आगे बढ़ाइए— हमें आज़ाद हुए पैंसठ साल हो गए?   —इस घर में जितने रहने वाले हैं उनसे ज़्यादा सवाल हो गए।   —माना पहले से ज़्यादा ख़ुशहाल हो गए, लेकिन कंगाल तो और कंगाल हो गए। कंगालों से जुड़े सवाल विकराल हो गए।   —कभी पड़ौसी जी का जंजाल हो गए, कभी घर में ही…


Read More

भीषण भिड़न्त हुई भयानक हड़बड़ी

भीषण  भिड़न्त  हुई  भयानक  हड़बड़ी

भीषण  भिड़न्त  हुई  भयानक  हड़बड़ी         (लोग  नहीं  जानते  कि  आजकल  मुर्दा  भी  नाराज़  हो  सकता  है) मोड़  के  इधर  से श्रीमानजी  की दनदनाती  हुई साइकिल  जा  रही  थी, उधर  से ‘राम  नाम  सत्य  है’ एक  अर्थी  आ  रही  थी।   भीषण  भिड़न्त  हुई भयानक  हड़बड़ी, अर्थी  बेचारी  नीचे  गिर  पड़ी।   —दिखाई  नहीं  देता…


Read More

प्रेम कैसे हो आधा-आधा

प्रेम कैसे हो आधा-आधा

प्रेम कैसे हो आधा-आधा (प्रेम पूर्ण देकर प्रतिदान में पूर्ण ही चाहता है) श्रीमान जी बोले— एक ग़ज़ल हुई है बहुत दिन के बाद। मैंने कहा— इरशाद, इरशाद!   आती नहीं है उसके जीवन में कोई बाधा, राधा ही रुक्मिणी हो और रुक्मिणी हो राधा।   जब पूर्ण दे रहा है तो पूर्ण तुमसे चाहे,…


Read More

पुन्ना की ग़मगीन गायकी

पुन्ना की ग़मगीन गायकी

पुन्ना की ग़मगीन गायकी (बच्चा हो या बूढ़ा सुर की मार बड़ी तगड़ी होती है) नन्हा-मुन्ना छोटा-सा पुन्ना संगीत का परम शौकीन था, पर रियाज़ के समय बुआ ने कमरे से निकाल दिया इसलिए ग़मगीन था।   गाने की आवाज़ दरवाज़े के बाहर तक लहराती हुई आ रही थी, बुआ तन्मय होकर गा रही थी— जोगी मत जा मत जा मत जा…. । बेचारा पुन्ना दरवाज़े से कान लगा कर खड़ा रहा खड़ा रहा! अंदर जाने की तमन्ना पर अड़ा रहा। सुरों का मतवाला,…


Read More

दिशाओं में गूंजती है फेनिल हंसी

दिशाओं में गूंजती है फेनिल हंसी

दिशाओं में गूंजती है फेनिल हंसी (ये हंसी मां और शिशु के बीच संवाद की पूर्वपीठिका है)   पोपला बच्चा देखता है कि उसकी मां उसको हंसाने की कोशिश कर रही है।   भरपूर कर रही है, पुरज़ोर कर रही है, गुलगुली बदन में हर ओर कर रही है।   तरह तरह के मुंह बनाती है, आंखें कभी चौड़ी करती है कभी मिचमिचाती है।   उसे उठा कर चूम लेती है, गोदी में उठा कर घूम लेती है।   मां की नादानी को…


Read More