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चौं रे चम्पू

राष्ट्रीय सहारा में प्रत्येक बुधवार को प्रकाशित

पपड़ियां और चूना

व्यस्त थे, लेकिन महबूब स्टूडियो में शाम चार बजे बुला लिया। पहुंच गए जी सैट पर। टीवी मॉनीटर के पास हमें प्रेमपूर्वक बिठा दिया गया। अमित जी एक मध्यवर्गीय परिवार के कमरे में सूट पहन कर सोफे पर बैठे हुए शॉट के लिए तैयार थे। ऐक्शन के साथ ही कमरा हिला, दीवारों से चूना गिरा और वे धूल-धूसरित हो गए।


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ब्रज की बगीचियां

मुकेश जी के साथ बचपन की ख़ूब सारी यादें ताज़ा हुईं। वे मेरे बाल-सखा रहे हैं। उनसे बड़ी ईर्ष्या होती थी। वे कला-क्षेत्र में थे और मैं विज्ञान में। वे संगीत सीखते थे और मैं फिज़िक्स, कैमिस्ट्री और गणित में उलझा हुआ था। अपनी कक्षाओं से खिसक कर मैं उनकी कक्षा में बैठ जाता था।


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मटियामेट हो गई जवाबदेही

धन्य हैं हमारे जंगल अभियंता! सरकारी नीति-नियंता! कोई विधायक घोड़े की टांग तोड़ता है, कोई कुर्सी नहीं छोड़ता है, पर जंगल की ओर ध्यान कोई नहीं मोड़ता है। सिमट गए जंगल-सनेही, मटियामेट हो गई जवाबदेही।


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उत्तर मिल गया

रिश्ते बिना मुस्कान के। मामले ज़र, जोरू, ज़मीन, मकान और दुकान के। मुंसिफ़, मसाइलों से परेशान! जज, गगनचुम्बी फ़ाइलों से परेशान। बयान बाज़ नहीं आते हेराफेरी से। न्याय मिलता है मगर देरी से। यहां कोई भी तो किसी का नहीं है। झगड़े मिटाना ही तो सीखा नहीं है। ये मंडी है मृतप्राय मुंडों की। यहां गुपचुप गोपन गलियां हैं गुंडों की।


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खगोलकुंडा का कोहिनूर

सरकार बाहर से शासन देखती है और कोर्ट अंदर से। शायद सरकार नहीं चाहती, क्योंकि कोहिनूर से भाग्य और दुर्भाग्य की कहानियां जुड़ी हुई हैं। इसे रखने वाले पुरुष शासक नेस्तनाबूद हो गए, जबकि महिलाओं ने भरपूर शासन किए। बला दूर ही भली। आ गया, तो कहीं ले न जाय विपक्षी लली। सुप्रीम कोर्ट संभावना की खिड़की खुली रखना चाहता है।


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शनि का हाईकोर्ट

औरत सनी देव के चौंतरा पै चढ़ि गईं, जीत भई उनकी? —मामला हार-जीत का है ही नहीं। स्त्री द्वारा पुरुष के सामने अपने अस्तित्व की रक्षा करने का है। भेदभाव क्यों हो? यह लड़ाई महिलाओं द्वारा पूजा किए जाने के पक्ष में उतनी शायद नहीं थी, जितनी स्वयं को दूजा मानने और दोहरे मानदण्ड अपनाने के विरुद्ध थी।


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एकता में भरापूरा शून्य

उस समय मैं शून्य में था। इन दिनों मैं प्रायः शून्य में ही रहता हूं। यह तो निर्विवाद है कि शून्य का आविष्कार भारत में हुआ, इसलिए एक देशप्रेमी होने के नाते मुझे शून्य से प्यार होना चाहिए। शून्य से प्यार करना मेरा धर्म है, एक से प्यार करना मेरा कर्तव्य है।


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गए गावतकिए नए चावचकिए

पिछले दस साल में कविसम्मेलन बहुत बदल गए हैं चचा। मंच पर अच्छी कविता के मानक बदल रहे हैं। अनेक अच्छे कवि मंच पर आए, वक्त की आंधियों से प्रभावित नहीं हुए, भले ही उन्हें कम निमंत्रण मिलें।


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अंड-बंड और टिकिट फ़ंड

आपके प्रश्न में उत्तर है और उत्तर में उत्तराखंड। क्या अंड-बंड? घोड़ा शक्तिमान प्रचंड, पश्च वाम टांग खंड-खंड। आक्रामक षंड, हस्त तीव्र मारक दंड! राष्ट्रपति भवन-धायक विधायक अब पाते हैं, खाते ना अघाते मधुर श्री श्री श्रीखंड। सत्ता की अलबत्ता बिछी है बिसात, तेरी-मेरी क्या बिसात, रात में और सघन रात उद्दंड! क्या अंड-बंड? दंड का माप नहीं, माप का दंड नहीं, फिर क्या मापदंड?


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मन तो करता है

गुलाल तो बस बालों में रह गया है. कल देखते तो सर्वांग गुलालित्य था। होली के लिए विभिन्न चैनल इन दिनों कार्यक्रम बना रही हैं। होली का पूर्वाभ्यास चल रहा है। एक चैनल ने ‘रंग-रसिया’ कार्यक्रम के लिए मुझे भी बुलाया। गीत-संगीत, नृत्य, रास, कविता के सामूहिक रस-वर्षण में चचा, आनंद आया।


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