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ज़िन्दगी के रस्ते का मुसाफ़िर बना दो

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ज़िन्दगी के रस्ते का मुसाफ़िर बना दो

(महंगे स्कूलों में पढ़ाना अभिभावकों की चाहत है जबकि जिन्दगी से बड़ा स्कूल कहां?)

 

प्यारे अभिभावको!

देखो तो सही ज़रा

शिक्षा के भाव को।

मेहनत करो कमाओ

स्कूलों में चढ़ावा चढ़ाओ!

खाते रहो

अभावों के घाव को।

प्यारे अभिभावको!

 

वेटिंग लिस्ट में है

तुम्हारे बच्चे का नम्बर,

तुमने एक कर दिए

धरती-अम्बर।

नहीं आया लिस्ट में नाम,

उदास सुबह, उदास शाम।

 

तुम्हें स्कूल चाहिए सबसे अच्छा,

जहां से बहुत बड़ा होकर निकले

तुम्हारा बच्चा।

पर ध्यान रखो

स्कूल से क्या होता है?

आज एमबीए, इंजीनियर, डॉक्टर भी

बेरोज़गारी का बोझा ढोता है।

 

घर पर नहीं हैं सब्जी के थैले,

और तुम पुजापा चढ़ाकर

चाहते हो कि

उसका नम्बर आए सबसे पैले।

दरसल मैले हैं तुम्हारे प्रयत्न

अगर फूल में महक है

तो कौन रोकेगा कि वो न फैले।

 

बच्चे को महंगे स्कूलों के

बेमतलब बस्तों के बोझे से मत लादो,

ज़िन्दगी के रस्ते का मुसाफिर बना दो।

वो अपनी जिंदगी को अपनी

अपने हिसाब से खेले,

तुम्हारे बोझिल इरादे न झेले।

 

 


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