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  • ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा
  • 20110427 Zindagi ka falsafa(कहने को चार मुक्तक पर कहन में अनेक विचार)

    1.

    दिल की बातें दिल में ही रहना मुश्किल है,

    उन बातों का भाषा में बहना मुश्किल है,

    मीठा मीठा दर्द उठा करता जो अंदर,

    सहना है आसान मगर कहना मुश्किल है।

    2.

    जो मेहनत करी तेरा पेशा रहेगा

    न रेशम सही तेरा रेशा रहेगा

    अभी कर ले पूरे सभी काम अपने

    तू क्या सोचता है हमेशा रहेगा?

    3.

    ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा गाते रहे,

    क्या करूं, ये मुझको समझाते रहे,

    सुन रहा था गौर से, पर यक-ब-यक

    एक हिचकी आई और जाते रहे।

    4.

    मदद करना सबकी, इनायत न करना,

    न चाहे कोई तो, हिदायत न करना।

    शिकायत अगर कोई, रखता हो तुमसे

    पलटकर तुम उससे, शिकायत न करना।

     

    wonderful comments!

    1. sunita patidar Jul 21, 2011 at 6:14 am

      गर शिकायत करते रह गये . कब जिंदगी छुट गयी जान न सकोगे . इसलिए अपनो से मिलते मिलाते रहना . जो मिल जाये गेंर भी उनेह भी हिलाते रहना .

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