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  • umra bhar saath nibhaane kee baat

     

     

     

     

     

     

     

     

    उम्र भर साथ निभाने की बात

    (परिवर्तन क़ुदरत के नियम हैं लेकिन कुछ बदलाव नहीं हों तो अच्छा है)

     

     

    जब तलक

    साथ मज़ा देता

    जिंदगानी में,

    तब तलक राहगीर

    साथ चलते देखे हैं,

    उम्र भर साथ निभाने की

    बात कौन करे,

    लोग अर्थी में भी

    कंधे बदलते देखे हैं।

     

    तबाही चीख के

    कहती है मुझको बचवाओ,

    कचहरी देख के कहती है

    गवाही लाओ!

    बेगुनाही की

    वकालत को गए

    तब हमने,

    गरदनों के लिए

    फंदे बदलते देखे हैं।

    नज़र को चाहिए

    हर पल हसीन नज़राना,

    बदल बदल के

    हर इक ख़्वाब

    के अंदर जाना,

    सचाइयों की तिजारत तो

    सरेआम है अब,

    हमने तो ख़्वाब भी

    धंधे बदलते देखे हैं।

     

    वक़्त पर

    हाथ मिलाने से

    मियां चूक गए,

    दुश्मनी की जगह पे

    दोस्ती को फूंक गए।

    रहे तड़ी में

    पड़ी जब कड़ी छड़ी दिल की,

    हमने पत्थरनुमा

    बंदे बदलते देखे हैं।

     

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