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  • टूट गया काला चश्मा

    tut gayaa kaalaa chashmaa

     

     

     

     

     

     

     

     

    टूट गया काला चश्मा

    (आख़िर ये काला चश्मा है कौन सी चीज़)

     

    ख़र्चा बहुत ज़्यादा है!

    कुछ काम-धंधा भी करोगे?

    पिता बोले— या सिर्फ़

    आवारागर्दी का इरादा है?

     

    राजकुमार जेब में

    चश्मा टटोलता है रह-रह,

    नौकरी की जगह

    टके से जवाब की तरह।

     

    मंदिर मस्जिद या गुरुद्वारा आता है

    वह तीनों जगह सिर झुकाता है,

    लेकिन पहले काला चश्मा लगाता है।

    फिर वह चश्मा लगाए लगाए ही

    देखता है सिनेमा,

    नई प्रियंका या पुरानी हेमा।

    प्लीज़, डा. नामवर सिंह जी, प्लीज़,

    बताइए कि ये काला चश्मा

    आख़िर है कौन सी चीज़?

    उसकी अस्मिता है या आत्म-निर्वासन

    उसका विद्रोह है या पलायन?

    जीवन संगीत का रतौंधी अंग है

    या दिन के उजाले से मोह भंग है?

    दरअसल, काला चश्मा

    उसकी शर्म-निरपेक्षता है,

    वह बेशर्म ज़िंदगी को

    अपनी शर्म के साथ देखता है।

    आप ग़लत न समझें कहीं,

    वह शर्म में निरपेक्ष है शर्म से नहीं।

     

    आज बहुत बेचैन है राजकुमार

    क्योंकि अभी अभी

    उसे छद्म शर्म-निरपेक्ष बताकर

    एक प्रतिकार सेवक

    उसका काला चश्मा तोड़ गया,

    और ढेर सारे सवालों के

    खौलते तालाब में

    उसे नंगी आंख छोड़ गया।

    wonderful comments!

    1. gul sarika जुलाई 23, 2012 at 1:30 अपराह्न

      bahut hi sundar

    2. Nirmal Purohit जुलाई 24, 2012 at 11:51 पूर्वाह्न

      wahwa wahwa !! bahut khub likha.... kafi gehrai h isme.... jara dhayan se sabhi padhe.... dhanyawad Ashokji....!!!!

    3. vishwat sen जुलाई 24, 2012 at 11:53 पूर्वाह्न

      इस अंजन को आंखों में लगा ले यदि कोई। न बेकारी रहेगी और न ही बेकार कोई।।

    4. Rajendra Kumar जुलाई 26, 2012 at 4:31 पूर्वाह्न

      kaala chashma..sharm-nirpekhta.. naye bimb.. kya baat hai sir??

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