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  • स्वप्न हो गए भंग, प्रात: टूटा हर अंग

    sawpan ho gaye bhang, prata tootaa har ang

     

     

     

     

     

     

     

     

     

    स्वप्न हो गए भंग, प्रात: टूटा हर अंग

    (पीने वाले को जीने का बहाना चाहिए जीने वाले को पीने का)

     

    हां रात में हमने पी!

    कुछ खुशी मिले हमको, इस नाते शुरू करी,

    पर चली दुखों की आरी,

    जो बनी घनी दुखकारी।

     

    पी, सोचा रिश्तों में हों मीठे संपर्की,

    पर कुछ ही पल के बाद,

    हम करने लगे विवाद।

     

    पी, इस इच्छा से हम, मज़बूत करें मैत्री,

    पर कहां रहा खुश मन,

    हम बन बैठे दुश्मन।

     

    पी, लगी ज़रूरत सी, हौसला बुलंदी की,

    पर ज्यों ज्यों जाम भरे,

    हम खुद से ख़ूब डरे।

     

    पी, सबको बतला कर, सेहत के कारण ली,

    पर हाय नतीजा भारी,

    बढ़ गईं और बीमारी।

     

    पी, सोचा पल दो पल, हों बात मधुरता की,

    पर लब नाख़ून हुए,

    भावों के ख़ून हुए।

     

    पी, सुलझाएं मसले, कुछ ऐसी कोशिश की।

    हमने क्या मार्ग चुना,

    बढ़ गए वो कई गुना।

     

    पी, जीवन स्वर्ग बने, कुछ ऐसी चाहत थी,

    पर सब कुछ बेड़ागर्क,

    हर ओर दिखा बस नर्क।

     

    नींदों की राहत की चाहत में ही पी ली,

    पर स्वप्न हो गए भंग,

    प्रात: टूटा हर अंग।

     

    हां रात में हमने पी!


     

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