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  • samandar kee chanchal lahare tujh see gambheer naheen hain

     

     

     

     

     

     

     

    समंदर की चंचल लहरें तुझ सी गंभीर नहीं हैं

    (प्रेम सागर से भी गहरा होता है, अगर होता है।)

     

     

    तू जो होती तो तुझे

    लहर मैं समझ लेता,

    लेट जाता मैं

    समंदर के किनारे के

    नर्म बिस्तर पर,

    और तू

    दिल की गीली हलचल पर

    दूर से दौड़ के आती…. गिरती।

     

    घेर लेती मुझे

    मासूम सफ़ेद झागों से

    झाग जो देर तक बने रह कर

    हौले हौले से मुझे

    हर तरफ़ से छूते हुए

    सरक के गंध उड़ाते हुए

    ढलक जाते।

     

    याद है तुझको

    आरगैंडी की धवल साड़ी!

    समेट कर तू उसे

    और फिर से मिलने को,

    बन लहर दूर चली जाती थी

    और फिर

    दूनी हां दूनी गति से,

    मेरे दिल के क़रीब आती थी।

     

    पर समंदर की ये चंचल लहरें

    तुझ सी गंभीर नहीं हैं

    कि नहीं रुकती हैं।

    तू समंदर से है कितनी मोहक

    तू समंदर से है कितनी व्यापक

    तू समंदर से है कितनी गहरी

    तू समंदर से है कितनी लहरी

    मेरे नज़दीक ठहर जाती थी,

    प्यार करती थी

    पास रहती थी

    मेरे अंदर के समंदर में

    समा जाती थी।

     

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