मुखपृष्ठ>
  • खिली बत्तीसी
  • >
  • समन्दर देख ले हौसला हमारा
  • समन्दर देख ले हौसला हमारा

    samandar-dekh-le-hosalaa-hamaaraa

     

     

     

     

     

     

     

     

    समन्दर देख ले हौसला हमारा

    (जापान की हर गीली आंख के कंधे पर हमारी राहत की चाहत का हाथ है)

     

    बहुत पहले बहुत पहले

    बहुत पहले से भी बहुत पहले

    पीड़ा के पहले आंसू के कारण

    समंदर सारा का सारा,

    हो चुका था खारा।

     

    लेकिन ज़िंदगी नहीं हारी

    न तो हुई खारी,

    बनी रही ज्यों कि त्यों

    प्यारी की प्यारी।

    क्योंकि हर गीली आंख के कंधे पर

    राहत की चाहत का हाथ था,

    इंसान का इंसानियत से

    जन्म-जन्मान्तर का साथ था।

     

    फिर से चूल्हे सुलगे

    और गर्म अंगीठी हो गईं,

    मुहब्बत की नदियां

    फिर से मीठी हो गईं।

    फिर से महके तंदूर,

    फिर से गूंजे और चहके संतूर।

    फिर से रचे गए

    उमंगों के गीत,

    फिर से गूंजा जीवन-संगीत।

     

    शापग्रस्त पापग्रस्त समंदर

    भले ही रहा खारे का खारा,

    लेकिन उसने भी देखा

    हौसला हमारा।

     

    मरने नहीं देंगे किसी को

    हम फिर से आ रहे हैं

    तेरी छाती पर सवारी करने।

     

    इस बार ज़्यादा मज़बूत है

    हमारी नौका,

    छोड़ेंगे नहीं

    जीने का एक भी मौका।

     

     

    wonderful comments!

    प्रातिक्रिया दे

    Receive news updates via email from this site