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सारा जहान तेरा है

saaraa jahaan teraa hai

 

 

 

 

 

 

 

 

सारा जहान तेरा है

(एक साथ बोधन, संबोधन और उद्बोधन)

 

तू गर दरिन्दा है

तो ये मसान तेरा है,

अगर परिन्दा है

तो आसमान तेरा है।

 

तबाहियां तो किसी और की

तलाश में थीं,

कहां पता था उन्हें

ये मकान तेरा है।

 

छलकने मत दे अभी

अपने सब्र का प्याला,

ये सब्र ही तो

असल इम्तेहान तेरा है।

 

न बोलना है तो मत बोल

ये तेरी मरज़ी,

तेरी चुप में भी

मुकम्मल बयान तेरा है।

 

हो चाहे कोई भी तू

हो खड़ा सलीक़े से,

ये फ़िल्मी गीत नहीं

राष्ट्रगान तेरा है।

 

तू अपने देश के दर्पण में

ख़ुद को देख ज़रा,

सरापा जिस्म ही

देदीप्यमान तेरा है।

 

हर एक शख़्स यहां का

तेरा है, तेरा है,

तेरा है क्योंकि दिलों पर

निशान तेरा है।

 

भुला दे अब तो भुला दे

कि भूल किसकी थी!

अशोक चक्रधर,

सारा जहान तेरा है।

 


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18 Comments

  1. भुला दे अब तो भुला दे

    कि भूल किसकी थी!

    अशोक चक्रधर,

    सारा जहान तेरा है।
    sunder bhavon se saji sunder kavita
    saader
    rachana

  2. खूबसूरत भाव से सजी सुन्दर रचना |

  3. हो चाहे कोई भी तू
    हो खड़ा सलीक़े से,
    ये फ़िल्मी गीत नहीं
    राष्ट्रगान तेरा है।

    Sirf Ek Kavi hi shabdon se Kissi ko Sharminda Kar Sakta hai.

    Ashok Ji Aap Hindustan ke Sabse Behtreen Vayankaar Mein se Ek Hain.

  4. 1993 में आपको सुना था bangkok में ।
    फिर याद ताज़ा हो आई
    वो लम्हा भी मेरा था
    ये लम्हा भी मेरा
    बस उन पे काबिज़
    ये काव्यजाल तेरा है

    प्रणाम आपको

    क्या खूब कहा आपने :

    परिंदा है तो आसमान तेरा है

  5. sir!
    sara jahan apse or apki kavita o se roshan h,,
    gum me bhi,,apke haasya hmhe khushi ka dete promotn h,,,
    apki kavita k bina,,jag me bs pollutn hai,,
    yeh hmhara personll avlokan hai……….

  6. chandra shekhar ojha |

    Ashok je Abhiwadan
    avita dil ko chhu gaye kah kar santosh naheeh hota.AApne naam ko(ASHOKCHAKRA-DHAR)sarthak kiya hai.Aapne KAKA je kee
    dharohar ko smman poorvak samhala hai.Koti 2 pranam.

  7. sir!
    bahut sunder likha h,,
    evry line encourage,motivate nd gv guideline 2 dis greedy world!!!

  8. sanjay kumar tiwari |

    अशोक जी सादर नमस्ते …..
    सँदेश देती बेहतरीन रचना ।

  9. sunder rachna se sajaa khoobsoorat bhaav

  10. Naveen Pradhan |

    Saara Jahaan Teraa Hai,

    Usmen Tanik Saa Meraa Hai,

    Usmen dosti ka dheraa hai,

    Usmen naa koi Pheraa hai,

    Naa Raat sirf saveraa hai.
    ,

  11. Naveen Pradhan |

    Saaraa Jahaan Teraa Hai,Vah! kyaa baat hai,Ashok ji Kamaal Hai!!!!

  12. Sudhir Joshi |

    bbb

  13. Sudhir Joshi |

    अशोक जी, हम सब लोग (में और मेरे परिवार के सभी सदस्य) आपकी कविताओं के सदैव से प्रशंसक रहे हैं. यह कविता भी हमेशा की तरह बहुत खूबसूरत लगी. संपूर्ण कविता एक सन्देश देती है , फिर भी विशेष रूप से निम्न पंक्तिया सबसे खूबसूरत लगी मुझे-

    तू गर दरिन्दा है

    तो ये मसान तेरा है,

    अगर परिन्दा है

    तो आसमान तेरा है।

    तबाहियां तो किसी और की

    तलाश में थीं,

    कहां पता था उन्हें

    ये मकान तेरा है।

  14. मुझे ये कहने में कोई हिचक नहीं कि मैंने हिंदी कविता को आपके काव्यपाठ से ही जाना है | मैंने अपना पहला कवि सम्मलेन २००३ में (जब मेरी उम्र १३ साल थी) सुना था, उसमे आप संचालक थे | और आज भी उसी भाव से मैं आपको सुनता / पढता हूँ |
    अद्भुत छंद है ….गुरु जी |

  15. मान्यवर , कहने में नहीं तनिक संकोच कि आपकी वेबसाइट आपके हास्य व्यंग कि रचना ही जान पड़ती है … ढूँढना पड़ता है कहाँ क्या छुपा रक्खा है आपने, किस कोने में.. अक्षर ऐसी आड़ी तिरछी जैसे बिना मन का आपका सम्मलेन… कविवर , थोड़ा तो एहशान करो हम पर और कुछ खर्च करडालो साईट के निर्माण पे ठीक उसी तरह का जैसा नेताजी लोग कर रहे इस देश के उत्थान का…. बाकी नेताओं कि भोट के तरह डाऊनलोड करने कि कीमत तो न उगाहे श्रीमान मान्यवर चक्रधर जी….
    निवेदित – अजित पाण्डेय

  16. Anupama Saini |

    Ek bar ohir aapne khoobsurti se apni bhavnao ko sahaj shabdo me piroya hai! Ye kavita beshak apni chap chodne me safal hui ha guruji! Adbhoot!

  17. जी हाँ श्रीमान ! सब कुछ आपका ही है।

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