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    प्रेम जिसे निश्छल मिलता है

    (पता नहीं क्या कब मिलता है)

     

    ग़लत किए का

    फल मिलता है,
    आज नहीं तो

    कल मिलता है।

    अच्छे किए गए

    कामों का,

    कहां किसी को

    तल मिलता है।

    सुख दुख में जो

    रहे एक सा,
    उसी मित्र से

    बल मिलता है।

    बंजर से बंजर

    धरती में,
    नीचे जाकर

    जल मिलता है।

    बाहर जब

    उलझन हों ज़्यादा,
    अंदर से ही

    हल मिलता है।

    प्यास प्रेम की

    सघन रहे तो,
    दमयंती को

    नल मिलता है।

    अपने अंदर

    झांक सकें हम,
    कहां एक भी

    पल मिलता है?

    वह अमीर है

    सबसे ज़्यादा,
    प्रेम जिसे

    निश्छल मिलता है।

    wonderful comments!

    1. RAMKESH MEENA Jul 4, 2012 at 10:39 am

      MUJHE AAPKEE KAVEETA BAHOOT ACHCHEE LAGTEE HAI.

    2. कृष्ण वर्मा Jul 7, 2012 at 8:17 am

      बहूत बढ़िया सर बहुत खूब....

    3. Divya Nishant Ranote Jul 8, 2012 at 10:01 am

      great sir, amir wohi jise pyar nishal milta hai..wah kya baat hai !!!!!!!!!!!!!

    4. Rachin Agarwal Jan 31, 2013 at 7:22 pm

      Sriman Chakradhar ji...in panktiyon mein jeevan ka poora saar likh diya...jitni chhoti ye panktiyan hein inme gehrai utni hi zyada hai.... mann ki aawaz se mein ye keh raha... jitna bhi pada...khub raha ..khub raha ...khub raha

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