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प्रेम जिसे निश्छल मिलता है

prem jise nishchhal milataa hai

 

 

 

 

 

 

 

 

प्रेम जिसे निश्छल मिलता है

(पता नहीं क्या कब मिलता है)

 

ग़लत किए का

फल मिलता है,
आज नहीं तो

कल मिलता है।

अच्छे किए गए

कामों का,

कहां किसी को

तल मिलता है।

सुख दुख में जो

रहे एक सा,
उसी मित्र से

बल मिलता है।

बंजर से बंजर

धरती में,
नीचे जाकर

जल मिलता है।

बाहर जब

उलझन हों ज़्यादा,
अंदर से ही

हल मिलता है।

प्यास प्रेम की

सघन रहे तो,
दमयंती को

नल मिलता है।

अपने अंदर

झांक सकें हम,
कहां एक भी

पल मिलता है?

वह अमीर है

सबसे ज़्यादा,
प्रेम जिसे

निश्छल मिलता है।


Comments

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4 Comments

  1. MUJHE AAPKEE KAVEETA BAHOOT ACHCHEE LAGTEE HAI.

  2. कृष्ण वर्मा |

    बहूत बढ़िया सर बहुत खूब….

  3. great sir, amir wohi jise pyar nishal milta hai..wah kya baat hai !!!!!!!!!!!!!

  4. Rachin Agarwal |

    Sriman Chakradhar ji…in panktiyon mein jeevan ka poora saar likh diya…jitni chhoti ye panktiyan hein inme gehrai utni hi zyada hai….
    mann ki aawaz se mein ye keh raha…
    jitna bhi pada…khub raha ..khub raha …khub raha

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