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शाम के डबडबाए हुई डार्क में - podcast episode 8

Ashok Chakradhar Uvaach - PODCAST

हर उम्र की अपनी चिंताएं होती हैं। प्रौढ़ होते हुए दो व्यस्कों आजकल जब आपस में बतियाते हैं तो प्राय: उनकी चिंताएं अपने बच्चों को लेकर होती हैं। उनके दिमाग़ों में जो विचार आते हैं, वे आत्मसंघर्ष करके टकराते हैं और कई बार वे समझ ही नहीं पाते हैं कि वे किन समस्याओं से वे जूझ रहे हैं।

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24 Comments

  1. mera pahla like hai yaad rakhiyega…;)

  2. mera pahla like hai yaad rakhiyega…;)

  3. mera pahla like hai yaad rakhiyega…;)

  4. May I mark the second like sir ?

  5. May I mark the second like sir ?

  6. May I mark the second like sir ?

  7. अशोक जी,

    अति सुन्दर रचना |

    इसी विषय पर एक छोटी सी कविता प्रस्तुत है | आशा करता हूँ, आप को पसंद आएगी |

    एचo केo एलo सचदेव

    मां-बाप के मन में अपने बच्चों के भविष्य के लिए एक निर्धारित लक्ष्य होता है,
    और उनकी सोच पर पूर्ण रूपेण उतर पाना बच्चों के लिए भी श्रेयकर होता है,
    पर बदलता समय उत्पन्न कर देता है बच्चों में एक स्वतंत्र विचारात्मक शक्ति –
    ऎसी परिस्थिति में एक टकराव के हो जाने की संभावना का जन्म होता है |

    ऐसे में मां-बाप का अपनी विचारधारा पर पुनर्विचार करना आवश्यक होता है,
    इस विचार विमर्श में बच्चों की समझ को सम्मान देना भी आवश्यक होता है,
    बच्चों को भी चाहिए अपनी एवं मां-बाप की सोच में कुछ तालमेल जमा पाना –
    ऐसे में एक स्वतंत्र वातावरण में एक संयुक्त निर्णय लेना ही श्रेयकर होता है |

    समय जब बदलता है तो उसके साथ कुछ नया बदलाव भी अवश्य होता है,
    समय के बदलने से पुरानी सोच का नए सांच में ढलना भी अवश्य होता है,
    कठिन तो लगता ही है समय के बदलाव के साथ कोई समझौता कर पाना –
    पर बुद्धिमान वही होता है जो समय के साथ खुद बदलने में क्षम्य होता है |

    • Prashant Srivastava |

      सचदेवा जी,
      आपके विचार अच्छे हैं, परन्तु ये कविता नहीं अपितु कोई गद्यांश लगता है।
      अंतिम पंक्ति में ‘क्षम्य’ की जगह ‘सक्षम’ शब्द को प्रयोग करें। क्षम्य का अर्थ होता है ‘क्षमा योग्य’।

  8. :
    अशोक जी,

    अति सुन्दर रचना |

    इसी विषय पर एक छोटी सी कविता प्रस्तुत है | आशा करता हूँ, आप को पसंद आएगी |

    एचo केo एलo सचदेव

    मां-बाप के मन में अपने बच्चों के भविष्य के लिए एक निर्धारित लक्ष्य होता है,
    और उनकी सोच पर पूर्ण रूपेण उतर पाना बच्चों के लिए भी श्रेयकर होता है,
    पर बदलता समय उत्पन्न कर देता है बच्चों में एक स्वतंत्र विचारात्मक शक्ति-
    ऎसी परिस्थिति में एक टकराव के हो जाने की संभावना का जन्म होता है |

    ऐसे में मां-बाप का अपनी विचारधारा पर पुनर्विचार करना आवश्यक होता है,
    इस विचार विमर्श में बच्चों की समझ को सम्मान देना भी आवश्यक होता है,
    बच्चों को भी चाहिए अपनी एवं मां-बाप की सोच में कुछ तालमेल जमा पाना-
    ऐसे में एक स्वतंत्र वातावरण में एक संयुक्त निर्णय लेना ही श्रेयकर होता है |

    समय जब बदलता है तो उसके साथ कुछ नया बदलाव भी अवश्य होता है,
    समय के बदलने से पुरानी सोच का नए सांच में ढलना भी अवश्य होता है,
    कठिन तो लगता ही है समय के बदलाव के साथ कोई समझौता कर पाना-
    पर बुद्धिमान वही होता है जो समय के साथ खुद बदलने में क्षम्य होता है |

  9. :
    अशोक जी,

    अति सुन्दर रचना |

    इसी विषय पर एक छोटी सी कविता प्रस्तुत है | आशा करता हूँ, आप को पसंद आएगी |

    एचo केo एलo सचदेव

    मां-बाप के मन में अपने बच्चों के भविष्य के लिए एक निर्धारित लक्ष्य होता है,
    और उनकी सोच पर पूर्ण रूपेण उतर पाना बच्चों के लिए भी श्रेयकर होता है,
    पर बदलता समय उत्पन्न कर देता है बच्चों में एक स्वतंत्र विचारात्मक शक्ति-
    ऎसी परिस्थिति में एक टकराव के हो जाने की संभावना का जन्म होता है |

    ऐसे में मां-बाप का अपनी विचारधारा पर पुनर्विचार करना आवश्यक होता है,
    इस विचार विमर्श में बच्चों की समझ को सम्मान देना भी आवश्यक होता है,
    बच्चों को भी चाहिए अपनी एवं मां-बाप की सोच में कुछ तालमेल जमा पाना-
    ऐसे में एक स्वतंत्र वातावरण में एक संयुक्त निर्णय लेना ही श्रेयकर होता है |

    समय जब बदलता है तो उसके साथ कुछ नया बदलाव भी अवश्य होता है,
    समय के बदलने से पुरानी सोच का नए सांच में ढलना भी अवश्य होता है,
    कठिन तो लगता ही है समय के बदलाव के साथ कोई समझौता कर पाना-
    पर बुद्धिमान वही होता है जो समय के साथ खुद बदलने में क्षम्य होता है |

  10. :
    अशोक जी,

    अति सुन्दर रचना |

    इसी विषय पर एक छोटी सी कविता प्रस्तुत है | आशा करता हूँ, आप को पसंद आएगी |

    एचo केo एलo सचदेव

    मां-बाप के मन में अपने बच्चों के भविष्य के लिए एक निर्धारित लक्ष्य होता है,
    और उनकी सोच पर पूर्ण रूपेण उतर पाना बच्चों के लिए भी श्रेयकर होता है,
    पर बदलता समय उत्पन्न कर देता है बच्चों में एक स्वतंत्र विचारात्मक शक्ति-
    ऎसी परिस्थिति में एक टकराव के हो जाने की संभावना का जन्म होता है |

    ऐसे में मां-बाप का अपनी विचारधारा पर पुनर्विचार करना आवश्यक होता है,
    इस विचार विमर्श में बच्चों की समझ को सम्मान देना भी आवश्यक होता है,
    बच्चों को भी चाहिए अपनी एवं मां-बाप की सोच में कुछ तालमेल जमा पाना-
    ऐसे में एक स्वतंत्र वातावरण में एक संयुक्त निर्णय लेना ही श्रेयकर होता है |

    समय जब बदलता है तो उसके साथ कुछ नया बदलाव भी अवश्य होता है,
    समय के बदलने से पुरानी सोच का नए सांच में ढलना भी अवश्य होता है,
    कठिन तो लगता ही है समय के बदलाव के साथ कोई समझौता कर पाना-
    पर बुद्धिमान वही होता है जो समय के साथ खुद बदलने में क्षम्य होता है |

  11. Hamesha ki tarah apki yeh racna bhi ek saugaat hai,shreeman..

  12. Hamesha ki tarah apki yeh racna bhi ek saugaat hai,shreeman..

  13. Hamesha ki tarah apki yeh racna bhi ek saugaat hai,shreeman..

  14. मिलती है शार्क भी पानी के डार्क में

  15. मिलती है शार्क भी पानी के डार्क में

  16. मिलती है शार्क भी पानी के डार्क में

  17. Anshul Pathak |

    sir,
    it is really it is the realm of new direction to coordinate between the two generations….you along with Mr.H.K.L.Sachdeva had done the great job.

  18. It is just by chance that I could read these poetries and comments. I am npw 92 years in age and had seen Chakra Dhar Ji in 1983/84 at 55 Kaka NagerNew Delhi at the residence of my rtelative Shri J.P. Chatutrvedi a famous journalist.I was then working with Mr Pradeep Chaturvedi for Solar Energy use after being retired from N.Rly. Now I am at Chicago and will be back to Delhi in Oct. I Know Shri Chakradhar is a very telented person and would like to rfead what he says.The subject of old and young is avery complex one and hardly a solution can be found if differences are noticed. Advices from learnrd persons are always welcome . Ganesh Chaturvedi

  19. Ashok Ji ,It is excellent.Just too Good Beyond Expression.Lots of regards for u

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