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  • चार उंगली, एक अंगूठा बराबर पांच – podcast episode 4
  • चार उंगली, एक अंगूठा बराबर पांच – podcast episode 4

    कुछ वर्ष पहले मैंने एक धारावाहिक बनाया था ‘बोल बसंतो’। महिलाओं की आय उपार्जक गतिविधियां। अब बड़ा भारी-भरकम सा शब्द मैंने बोल दिया है अर्थात कमाई के बढ़ाने के तरीक़े। उनको कैसे सुधारा जाए, इस पर आधारित था मेरा वह धारावाहिक। एक बुआ है उसमें और एक भतीजी। भतीजी पढ़ी लिखी है, समझदार है। लेकिन बड़े आसान शब्दों में अपनी उस बुआ को कमाई के तरीक़ों के मूलमंत्र सिखाती है जो कि बुआ धीरे-धीरे-धीरे-धीरे जान रही है और एक दिन उसने बताया कि बिना संगठन के आप काम नहीं कर सकती हैं। बढ़िया और बेहतर कमाई आपको नहीं होने देंगे लोग, अगर आप संगठित होकर आगे नहीं बढ़ेंगी। सबसे बढ़िया उदाहरण हमारे पास हाथ है। दोस्तो कोई कविता कैसे लिखी जाती है, कोई गीत कैसे बनता है, मैं आपको बताना चाहता हूं। मैंने अपने हाथ को तरह-तरह से हिला कर, घुमाकर देखा। एक उंगली इधर, एक उंगली उधर। इन उंगलियों में जो बात कही जा सकती है, एक प्रकार से वो मैंने कोशिश की। देखिए बुआ और भतीजी के बीच का संवाद……|

    wonderful comments!

    1. Richa Srivastava जुलाई 29, 2012 at 2:24 अपराह्न

      Very happy to hear your kavita in your own voice again after Sydney.Great topic and great rachna,Ashok ji-Thank you.....

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