अशोक चक्रधर > Blog > Podcast > धोबी का कुत्ता घर का न घाट का – podcast episode 3

धोबी का कुत्ता घर का न घाट का - podcast episode 3

Ashok Chakradhar Uvaach - PODCAST

मुहावरे न हों हमारी ज़िन्दगी में तो कहने वालों को आसानी न हो। जरा सी बात बड़ी हो जाती है और बड़ी सी बात को जरा सी बात में कह दिया जाता है। मेरी छोटी सी कविता में एक शब्द का भी इस्तेमाल किया है मैंने जिसके दो अर्थ हैं और जब ऐसा होता है तो कहते हैं कि श्लेष अलंकार होता है। अब अलंकार वलंकार में मत जाइए, ये देखिए कि घर पर धोबी के कुत्ते के साथ में क्या होता है और घाट पर क्या होता है…..।

Play

Comments

comments

5 Comments

  1. Kya shandaar tulna hai… Aap hamesha ki tareh
    Chaa gaye sir Ji

  2. i like all of your work/poems/kavitas.

  3. लेकिन आज पॉडकास्‍ट का बन कास्‍टली हो गया है

  4. paramvir singh sawhney |

    only one word sir , khoob, two words more sir, bahut khoob……

  5. Guru ji,
    kya kahen,…jawaab nahi aapki baat ka,
    Aapke paas sagar hai,samaye hue jujbaat kaaa…..
    bahut ummdaa……

Leave a Reply