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वेदना में नहीं संवेदना में कमी - podcast episode 12

Ashok Chakradhar Uvaach - PODCAST

एक बात रह-रह कर ज़ेहन में उठती है कि हमारे देश में वेदना में कमी आई है या संवेदना में। संवेदना तो कभी मरती नहीं है, ऐसा हम समझते हैं। कई बार ऐसा होता है कि संवेदना के स्रोतों के ऊपर यथार्थ के पत्थर रख दिए जाते हैं। ढंक दिया जाता है संवेदना को। संवेदना की स्रोतस्विनी मर जाती है। क़ाली हकीकतों को देखकर डर जाती है। ऐसे में, क्या ज़्यादा है, वेदना या संवेदना? हर कोई चाहेगा कि संवेदना ज़्यादा हो, लेकिन अख़बार, समाचार, मीडिया, वेदना के अलावा क्या देते हैं?

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9 Comments

  1. ati uttam. ati uttam prabhu. dil ko chu liya is kavita ne. gurudev.

  2. sir aap ki bat bahoot ucchi hai ,, samjhne ke liye kai logo ko वेदना-संवेदना ki defination samjhna padega ha ha ha ha ha ha

  3. sir aap ki bat bahoot ucchi hai ,, samjhne ke liye kai logo ko वेदना-संवेदना ki defination samjhna padega ha ha ha ha ha ha

  4. sir aap ki bat bahoot ucchi hai ,, samjhne ke liye kai logo ko वेदना-संवेदना ki defination samjhna padega ha ha ha ha ha ha

  5. JINDA LOGO KE LIYE वेदना-संवेदना,,, MURDO KO BASTI ME KHAH KI वेदना-संवेदना ??????

  6. JINDA LOGO KE LIYE वेदना-संवेदना,,, MURDO KO BASTI ME KHAH KI वेदना-संवेदना ??????

  7. JINDA LOGO KE LIYE वेदना-संवेदना,,, MURDO KO BASTI ME KHAH KI वेदना-संवेदना ??????

  8. संवेदना के अभाव में वेदना दिखती ही नहीं

  9. sir,kavita samvedna ki sambhavna ki janani ho,meri dua h.mai ri main kase….

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