अशोक चक्रधर > Blog > खिली बत्तीसी > पियक्कड़ जी और डॉक्टर

पियक्कड़ जी और डॉक्टर

20120910 -258 - piyakkadji aur doctor

पियक्कड़ जी और डॉक्टर

(समझाने के लिए कभी-कभी समानांतर कुतर्क सहारा देता है)

 

पियक्कड़ जी मरने पर थे उतारू,

इसलिए डॉक्टर ने बन्द कर दी दारू।

और जब तलब के कारण मरने लगे,

तो डॉक्टर से तर्क करने लगे।

 

—अगर मैं अंगूर का रस निकालूं

उसे अपने प्याले में डालूं

और पीने का लूं डिसीजन,

तो डॉक्टर साब ऐनी ऑब्जैक्शन?

 

डॉक्टर बोले— नहीं, नहीं बिलकुल नहीं!

 

—अगर उसमें थोड़ा सा पानी डालूं

और चम्मच से चला लूं?

 

—नहीं नहीं फिर भी नहीं!

 

—अगर उसका ख़मीर उठा लूं,

और गटागट चढ़ा लूं?

डॉक्टर महाशय थे पूरे अक्खड़,

बोले— मिस्टर पियक्कड़!

अगर मैं आव देखूं न ताव देखूं,

और मुट्ठी भर रेत आपके ऊपर फेंकू,

तो रेत शरीर पर फैल जाएगी,

लेकिन क्या चोट आएगी?

 

—नहीं नहीं बिल्कुल नहीं।

 

—अगर उसमें थोड़ा सा पानी डालूं

और मिलाकर मारूं?

 

—नहीं नहीं फिर भी नहीं!

 

—अगर उस गीली मिट्टी को पका लूं,

और ईंट बना लूं?

 

पियक्कड़ बोले— कृपा कीजिए,

नहीं पिऊंगा रहने दीजिए।


Comments

comments

49 Comments

  1. wah wah good. tussi chaa gaye.

  2. what a logic sir!

  3. पियक्कड़ जी को समझाने की
    डॉक्टर ने कोशिश जी तोड़ की
    बोतल भरी शराब की
    ईंट से तोड़ दी
    कभी कभी समझाने को
    दूसरे के लेवल पे आना पड़ता है
    बेटे को घोटाले का मतलब समझाने को
    उसके टिफिन से चोकोलेट चुराना पड़ता है

  4. शेलेन्द्र |

    आपका जवाब नहीं !!!

  5. पियक्कड़ महोदय कौन से कम थे तपाक से बोले डॉक्टर साहेब जो काम मैं बोतलों पे बोतले चढ़ा कर करता वो आप पहले हि करने लग गए हो कही आप ने भी पी ली है क्या खुद पीकर आप मुझे कैसे रोकोगे?

    डॉ. प्रमोद कुमार

  6. wah wah maan gaye sir apko gr8

  7. अशोक चक्रधर जब भी हँसाते हैं पूरे कुतर्क के साथ हँसाते हैं।

  8. अशोक चक्रधर जब भी हँसाते हैं पूरे कुतर्क के साथ हँसाते हैं।

  9. अशोक चक्रधर जब भी हँसाते हैं पूरे कुतर्क के साथ हँसाते हैं।

  10. log pata puchhte hain-par bulate nahi hain

  11. कुतर्कों पर आपके व्यंग्य बाण बेमिसाल हें। बहुत खूब …..

Leave a Reply