मुखपृष्ठ>
  • चौं रे चम्पू
  • >
  • फिर भी छियासठवें की जय हो
  • फिर भी छियासठवें की जय हो

    फिर भी छियासठवें की जय हो

     

    —चौं रे चम्पू! आज पन्द्रह अगस्त पै कोई विचार करिबे जोग बात है तेरे पास?

    —चचा, विचार करने योग्य तो हज़ारों बातें हो सकती हैं। हमारे राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त कह गए थे कि— ‘हम कौन थे, क्या हो गए हैं, और क्या होंगे अभी, आओ हमीं मिलकर विचारें, ये समस्याएं सभी।’ आप क्या! गुप्त जी हमसे कहगए हैं कि विचारो, विचारो। अब नहीं विचारोगे तो कब विचारोगे? कुछ महान समीक्षकों ने गुप्त जी को अभिधा का और तुकें मिलाने वाला कवि ठहरा दिया। बात तो उन्होंने कोई बेतुकी नहीं की थी। हमारी सांस्कृतिक धरोहर क्या थी, हम क्याहो गए और क्या होंगे अभी। विचारिए! मुग़ल शक्तियों के भारत में आने से पहले भारत का कुल परिदृश्य क्या था? क्या उस समय लड़ाइयां नहीं होती थीं? भारत में पहले से रहने वाले, हिन्दू कब से कहलाए? पहले तो शैव, शाक्त, वैष्णव,स्मार्त, बौद्ध, जैन आदि हुआ करते थे। आपस में अपने-अपने तरीके से लड़ते रहते थे। जब मुस्लिम धर्म हमारे देश में आया, तब शायद सोचा गया होगा कि पहले से रहने वाले, जो अलग-अलग देवताओं के मानने वाले लोग हैं, कुल मिलाकरक्या हैं। तब सिंधु से हिन्दू बना और वे सारे लोग हिन्दू कहलाने लगे। उसके बाद क्या हुआ? संस्कृतियां मिलीं। उसके बाद क्या हुआ? संस्कृतियां अभी तक नहीं मिलीं।

    —फिर का भयौ?

    —ये पंद्रह अगस्त के बाद सोलह अगस्त को देखना। कुछ लोग और मर चुके होंगे असम में, साम्प्रदायिकता के नाम पर। हम कौन थे, क्या हो गए हैं, और क्या होंगे अभी? गुप्त जी ने सिर्फ तुकें नहीं मिलाई थीं चचा। तुकें तो मैंनेमिलवाईं।

    —तैंनैं कहां मिलवाईं रे चम्पू?

    —आपके आने से पहले बगीची के अखाड़े के पहलवानों के बीच प्रस्ताव रखा कि भई तुक मिलाते हैं। एक लाइन दी और तुम्हारे पहलवान चालू हो गए। एक के बाद एक तुकें मिलाने लगे। मैंने लाइन दी कि हमें आज़ाद हुए पूरे पैंसठ साल होगए। एक पहलवान ने तुक मिलाई, इस घर में जितने रहने वाले हैं उनसे ज़्यादा सवाल हो गए। दूसरा बोला, माना पहले से ज़्यादा खुशहाल हो गए, लेकिन कंगाल तो और भी कंगाल हो गए। कंगालों से जुड़े सवाल विकराल हो गए।

    —हमाए अखाड़े के पहलवान कोई ऐसे-वैसे थोड़ई ऐं, दिमाग की बात करैं हैं।

    —हां, अगले ने एक दिमाग की बात बताई कि वह जो चौदह अगस्त को राष्ट्र बना, उसका नाम पाकिस्तान हो गया। फिर तुक मिलाई कि कभी पड़ौसी जी के जंजाल हो गए। कभी घर में ही धार्मिक धमाल हो गए। हम एक दूजे के लिएकाल-कराल हो गए। दिलों में अंतराल हो गए। बिना बात गुस्से के उबाल हो गए।

    —और सांत ऊ तत्काल है गए।

    —तुम भी तुक मिलाने लगे चचा! देखो, अच्छी चीजें भी हैं, बुरी भी हैं। ‘और क्या होंगे अभी’ वाला सवाल ज़्यादा महत्त्वपूर्ण है। ख़ैर, पहलवान आगे तुक मिलाने लगे। कुछ अर्से के लिए आपातकाल हो गए। बाद में उसका मलाल हो गए। कभी निहायत बेशर्मी से निहाल हो गए। बदरंग पर्यावरण में बेहाल हो गए। बमों की तरह फूटकर बबाल हो गए। दुर्घटनाओं से कम अस्पताल हो गए।

    —और का तुक मिलाईं?

    —बहुत से मसलों में हम दुनिया के सामने मिसाल हो गए। छाती चौड़ी करके विशाल हो गए। लेकिन गुरु घंटालों की मेहरबानी से घोटाला-घोटाल हो गए।

    —सो ठीक कही लल्ला! भ्रष्टाचार विरोधी ऊ मालामाल है गए।

    —हां इसलिए, क्योंकि दलीलों से ज़्यादा दलाल हो गए। स्नेह छोड़ नफरत के नक्काल हो गए। पता नहीं कहां-कहां इस्तेमाल हो गए। असल धमाल तो माल का है चचा। विचार करने वाली बात ये है कि जो गिरफ्तार होते हैं या जो गिरफ्तारकरते हैं, वो क्या हो गए हैं। उनकी दलीलें उनके दलाल तय करते हैं। चचा, पन्द्रह अगस्त लड्डू बांटने का दिन है, इसलिए मैं कोई निराशा की बात नहीं कहूंगा, लेकिन अंत में मैं भी तुक मिलाता हूं, ऐसे या वैसे, जैसे भी बहरहाल हो गए, इनपैंसठ सालों में हम किसी भी क्षण आ जाने वाला भूचाल हो गए। फिर भी छियासठवें स्वाधीनता दिवस की जय हो चचा!

     

    wonderful comments!

    1. Naveen Pradhan अगस्त 16, 2012 at 10:29 अपराह्न

      Hey!Paisath Saal Main Yadi Aisi Saskritiyan Mili Hain Tao Chcha Kyaa Mila...65 Sal Ek Desh Ke Liye Bahut Kam Hote Hain......Vaise Nakkalon Ko Tao......Kaal Ke Havale Karen....Aaj Aasam Ko Nahiin Shant Kar Paye....Aaj (16 08 12) Ko Bhi.Jal Rahaa Hai.Shrm Ki Baat Hai....Us Se Bhii Badii Baat Hai Ki Aasamiyon Se Bharee Trains.....Vapas Lejaarahiin Hain.....Bekasooron Ko....Dar Hai.....Hamen SHRM [email protected]

    2. Annavaram Rupesh Kumar अगस्त 17, 2012 at 2:19 पूर्वाह्न

      वाकई गुलामी से छियासठवें स्वाधीनता दिवस तक हम क्या से क्या हो गए !

    3. Annavaram Rupesh Kumar अगस्त 17, 2012 at 2:19 पूर्वाह्न

      वाकई गुलामी से छियासठवें स्वाधीनता दिवस तक हम क्या से क्या हो गए !

    4. Annavaram Rupesh Kumar अगस्त 17, 2012 at 2:19 पूर्वाह्न

      वाकई गुलामी से छियासठवें स्वाधीनता दिवस तक हम क्या से क्या हो गए !

    5. Naveen Pradhan अगस्त 17, 2012 at 4:30 पूर्वाह्न

      Hey! Ye Hai Real 15 August Ka Utsav.....naveenpradhan#satellite.

    6. Naveen Pradhan अगस्त 17, 2012 at 4:30 पूर्वाह्न

      Hey! Ye Hai Real 15 August Ka Utsav.....naveenpradhan#satellite.

    7. Naveen Pradhan अगस्त 17, 2012 at 4:30 पूर्वाह्न

      Hey! Ye Hai Real 15 August Ka Utsav.....naveenpradhan#satellite.

    8. Yogendra Singh Tihawali अगस्त 21, 2012 at 10:55 अपराह्न

      क्या बात है अशोक जी आजकल आपकी पेपर में एक से बढकर एक कविताये आ रही है ,,,,,आपका बहुत - बहुत धन्यवाद !!!

    9. Yogendra Singh Tihawali अगस्त 21, 2012 at 10:55 अपराह्न

      क्या बात है अशोक जी आजकल आपकी पेपर में एक से बढकर एक कविताये आ रही है ,,,,,आपका बहुत - बहुत धन्यवाद !!!

    10. Yogendra Singh Tihawali अगस्त 21, 2012 at 10:55 अपराह्न

      क्या बात है अशोक जी आजकल आपकी पेपर में एक से बढकर एक कविताये आ रही है ,,,,,आपका बहुत - बहुत धन्यवाद !!!

    प्रातिक्रिया दे

    Receive news updates via email from this site