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पावस का अभिसार गीत

paavas kaa abhisaar geet

 

 

 

 

 

 

 

 

पावस का अभिसार गीत

(रिमझिम की डोरी जब मेघों का झूला झुलाती है तो हिया हिचकोले भरता है।)

मेघों का झूला

रिमझिम की डोरी,

अंचल में अपने

तारे संजो री!

ऋतुओं से खेले

रंगों की होरी,

झूला झुलाए पवन

हर्षाए

चंचल चपल चकोरी।

तृष्णा अगन सी है

मन है गगन सा,

तन मेरा दहके महके

चंदन के वन सा,

उड़ने को व्याकुल मेरे

प्राणों का हंसा।

बंधन को माने न मन

चितवन

गहन सघन चोरी चोरी।

देह से आगे है

नेह का नाता

जी की जुड़न से ही

जग जगमगाता

प्रियतम

परम प्रिय प्रेम प्रदाता।

मधु मदमाता मदन

मनहर

मेह मेघ घनघोरी।

स्नेह सुधा रस में

सुध है न अपनी,

हिया हिचकोले भरे

साजन की सजनी।

सपने से मिलने को

आई है सपनी।

सुनने लगे हैं नयन

सखि अब!

कुंज निकुंज चलो री।


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