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निरुत्तर रह गई हवा

niruttar rah gaee havaa

 

 

 

 

 

 

 

 

 

निरुत्तर रह गई हवा

(हवा को गुरूर हो तो हवा से सवाल करें)

 

 

पत्तियां हिलीं फूल भी हिले

कुछ खिले-खिले

कुछ बिना खिले।

उन्हें किसने हिलाया

और किसने झुलाया उन्हें?

 

उन्हें मैंने हिलाया

और मैंने ही झुलाया उन्हें।

कहें हवा मुझे,

कहें हवा मुझे।

 

पंखुड़ी गिरीं फूल भी गिरा,

पत्तियां गिरीं भर गई धरा।

 

उन्हें किसने गिराया

और किसने उड़ाया उन्हें?

 

उन्हें मैंने गिराया

और मैंने ही उड़ाया उन्हें।

कहें हवा मुझे,

कहें हवा मुझे।

 

फिर नए पत्ते

फिर नई कलियां,

फिर से नए फल

फिर नई फलियां।

 

इन्हें किसने उगाया

और डाली पे सजाया इन्हें?

इन्हें किसने उगाया

और किसने सजाया इन्हें।

 

नहीं पता मुझे

तुही बता मुझे।

 

हा! हा!! हा!!!

उसे नहीं पता,

हवा की खिसक गई हवा।


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