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नारी के सवाल अनाड़ी के जवाब

प्रश्न 1. अनाड़ी जी, कहते हैं कि भगवान के मन्दिर में जूते-चप्पल नहीं ले जाने चाहिए, फिर जूतों की दुकान में भगवान की तस्वीरें क्यों लगाते हैं?

एकता मोदी

II-E-235, जे.एन.वी कॉलोनी

बीकानेर (राज.)

 

जूते की दुकान पर

हर जूता दुकानदार का

भगवान है।

दूकान पर सबके भगवान के लिए भी

आदरपूर्ण स्थान है।

मनुष्य के साथ बाहर निकलता है

दूकान से जूते का थैला,

थैले से बाहर आने के बाद

जूता हो जाता है मैला।

अब आपके पास जूते पहनकर

मन्दिर, मस्जिद, गुरुद्वारे में

जाने का अधिकार नहीं है,

क्योंकि भगवान को

तन-मन-धन का मैल

स्वीकार नहीं है।

 

प्रश्न 2. आप अनाड़ी होकर भी इतने अच्छे जवाब देते हैं तो उसके लिए आप कौन से लड्डू खाते हैं?

 

उ. र. गहाणकरी

26/1, राधिका ले-आउट

यवतमल-445001 (महाराष्ट्र)

 

अपन लड्डू खाते नहीं

दिल्ली में बनाते हैं,

जिसे इस राष्ट्र में

महाराष्ट्र तक के लोग खाते हैं।

लड्डू तो फ़क़त माल है

असल कमाल तो यवतमाल है

जहां ज़िन्दगी को

जश्न किया जाता है

और लड्डू खाकर

प्रश्न किया जाता है।

 

प्रश्न 3. अनाड़ी जी, यदि आप तानाशाह बने तो भ्रष्टाचार पर आपका पहला प्रहार क्या होगा?

रुनझुन शंकर

w/o. मानव शंकर

57, ऑरेंज फोर्थ फ्लोर

प्लैटिनम जुबली पार्क,

माता मन्दिर के पास, टी.टी.नगर

भोपाल (म.प्र.)

 

रुनझुन एक बात

तुम्हारी समझ में नहीं आती है,

भ्रष्टाचार की ताक़त ही

किसी को तानाशाह बनाती है।

अगर तानाशाह बन जाएंगे,

तो भ्रष्टाचार को दनादन बढ़ाएंगे।

क्योंकि भ्रष्टाचार भरपूर होता है

तानाशाही के ही तले,

हम तो लोकतंत्र के

अनाड़ी ही भले।

 

प्रश्न 4. अनाड़ी जी, मेहंदी का रंग तो थोड़े दिन में छूट जाता है पर जब कोई अपना हमसे दूर चला जाता है तो क्यूं इतना याद आता है?

वन्दना वर्मा

74-डी, रेसकोर्स,

पुलिस लाइन के सामने, गेट नं. 1

देहरादून-248001

 

हिना की रंगत

हाथ से तेरे

जाते-जाते जाएगी,

पर याद तो है

एक हिचकी जैसी

आती है तो आएगी।

नहीं रोक सकते तुम

यादों की हिचकी,

इनके कारण

कोई सिसका कोई सिसकी।

बिछुड़ने के पीछे

अगर हैं मजबूरियां,

तो यादें मिटा देती हैं

सारी दूरियां।

 

प्रश्न 5. अनाड़ी जी, नारियों की सहनशीलता को आप कैसे परिभाषित करेंगे?

सुधा जायसवाल

जैलगांव चौक

पो.ऑ. जमनीपाली

जिला-कोरबा-495450

 

नारी की सहनशीलता है

धरती की तरह

जो आंधी, पानी, तूफान

सब सह जाती है,

सबको भोजन देती है

जीवन उगाती है,

लेकिन जब हो जाती है

हद से ज़्यादा दुखी,

तो लाती है भूकम्प, सुनामी

और फूट पड़ती है

जैसे ज्वालामुखी।

 

प्रश्न 6. अनाड़ी जी, इस धरती पर पहले नारी आई या नर, क्या आप इस समस्या का समाधान करेंगे?

सुधा जायसवाल

जैलगांव चौक

पो.ऑ. जमनीपाली

जिला-कोरबा-495450

 

ये प्रश्न है

एक तलवार दुधारी,

इसका उत्तर देने में

मनुष्यता हारी,

पर अपुन चूंकि अनाड़ी हैं,

सबसे फिसड्डी हैं

पिछाड़ी हैं,

इसलिए

नर पूछता है

तो कहते हैं

पहले नर आया

नारी पूछती है

तो कहते हैं नारी।

 

प्रश्न 7. अनाड़ी जी, ऐसा कौन सा सवाल है, पति लोग जिसका जवाब देने में असमर्थ हैं और हमेशा रहते हैं?

पूजा दुआ

चन्दन फार्मेसी

जी.जी.आई.सी. के सामने, कालाडुंगी रोड

हल्द्वानी-263139, जिला-नैनीताल

 

प्यारी पूजा दुआ!

ये वाकई अच्छा सवाल हुआ।

पर इसने दिल को नहीं

महज़ दिमाग़ को छुआ।

जो सोचता है

सौ तरह के अर्थ,

उत्तर देने में

फिर भी असमर्थ।

सवाल होगा—

चुप्पी को चेहरे पर

क्यों टांग रहे हो,

बताओ

किसकी पूजा कर रहे हो,

किसकी दुआ मांग रहे हो?

 

 


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