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  • नारी के सवाल अनाड़ी के जवाब / 126 / दिसम्बर / 2013

     

     

    प्रश्न 1. अनाड़ी जी, जो लोग वोट डालने के लिए नहीं निकलते हैं, उनसे आप क्या कहेंगे?

    हिमांशी

    T-203, शुक्र बाजार, दूध डिपो के सामने

    उत्तमनगर, नई दिल्ली-110059

    ख़ुद पे और हमपे सितम ढाते हो,

    डालने वोट क्यों न जाते हो?

    वोट है सुन लो हमारी ताक़त,

    अपने अधिकार की भारी ताक़त।

    वोट के बल से देश चलता है,

    वोट से लोकतंत्र फलता है।

    वोट ताज़ा हवा का झौंका है,

    डालना वोट एक मौक़ा है।

    वोट देने अगर न जाओगे,

    बाद में बैठ के पछताओगे।

    वोट से देश ये फुलवारी है,

    डालना वोट ज़िम्मेदारी है।

    लेकिन

    ज़मीर अपना खुरेच मत देना,

    वोट तुम अपना बेच मत देना!

    ठीक बंदे को क्यों न लाते हो,

    डालने वोट क्यों न जाते हो?

     

    प्रश्न 2. प्यार में प्रेमी अपनी प्रेमिका के लिए आसमान का तारा तोड़ कर लाने की बात ही क्यों करता है?

    राखी राज

    एफ-120, प्रगति विहार हॉस्टल

    सीजीओ कॉम्प्लैक्स, लोदी रोड

    नई दिल्ली 110003

    तारा तोड़ कर लाने के पीछे

    ये है राज़,

    कि तारा नहीं है

    टमाटर प्याज़!

     

    प्रश्न 3. अनाड़ी जी, एक तरफ़ तो हमारे देश को हिंदीभाषी देश माना जाता है दूसरी ओर हिंदी मीडियम से पढ़ने वालों को बेवकूफ़ समझा जाता है, ऐसा क्यों?

    सात्विका सेठी

    11/6, एल्गिन, मिल नं. 1

    लोअर कम्पाउंड, पार्वती बागला रोड

    सिविल लाइंस

    कानपुर-208001  (उ.प्र.)

    कुछ लोग समझते हैं कि

    चार शब्द अगर

    अंग्रेज़ी के पढ़ जाएंगे,

    तो सबसे आगे बढ़ जाएंगे।

    बात ग़लत हो या सही,

    पर इस तरह से तो

    प्रगति होने से रही।

    हर देश अपनी भाषा पर

    गर्व करता है,

    एक हमारे देश का

    मध्यवर्गी समाज है

    जो अपनी भाषा का मज़ाक बनाकर

    अंग्रेज़ी में सर्व करता है।

    हिंदी नहीं है कोई भाषा हेटी,

    आत्मविश्वास रखो सात्विका सेठी!

     

    प्रश्न 4. अनाड़ी जी, नेताओं की कथनी और करनी में अंतर क्यों है?

    स्वाति प्रिया

    द्वारा-श्री पी.एन.साह

    फ्लैट नं. 4 बी, लक्ष्मण ब्लॉक, सीता कुंज अपार्टमेंट

    प्रोफेसर कॉलोनी, डॉ. एस.एन.यादव लेन

    करमटोली, रांची-834008 (झारखण्ड)

    मत देखो नेताओं की

    कथनी और करनी,

    हम जानते हैं

    जैसी करनी वैसी भरनी!

    देश जीता है या मरता है,

    अब इनकी

    परवाह कौन करता है!

     

    प्रश्न 5 अनाड़ी जी, नारी का अर्थ ही है, जिसका न हो कोई अरि फिर समाज शत्रु क्यों बन जाता है?

    दमयंती जगदाले

    97-ए, वृन्दावनधाम

    उज्जैन (म.प्र.)

    समाज मत कहो

    कहो पुरुष समाज,

    लेकिन ऐसा रहेगा नहीं

    जैसा है आज।

    नारी अब

    अपनी हिम्मत, हंसी और हौसले से

    नया मानचित्र बना रही है,

    अपनी कर्मठता से

    समाज को मित्र बना रही है।

     

    प्रश्न 6. पुरुषों की बेवफाई तो सदा से चली आ रही है, इधर स्त्रियां भी उस राह पर चल पड़ी हैं, कारण बताएंगे?

    रमा बाई

    बी-425, हरि नगर,

    नई दिल्ली

    पहला कारण तो

    आपने ही बता दिया

    आदरणीया रमा बाई!

    पुरुष की बेवफाई।

    बाकी कारण सबके लिए

    समान नहीं हैं,

    किसी और रास्ते जा सकती है स्त्री

    अगर पुरुष के मन में उसके लिए

    समुचित सम्मान नहीं है।

    पति पीटे, प्रेमी मरहम लगाए,

    तो स्त्री अपना समय

    प्रेमी के साथ क्यों न बिताए?

    दूसरी बात

    पति अगर अक्षम या बूढ़ा है,

    तो लोकाचार के लिए ठीक

    पर उसके लिए कूड़ा है।

    तीसरी बात ये कि अपनी कमियां

    किसी को नहीं दिखती हैं,

    इसीलिए परकीय संबंधों की विडम्बनाएं

    नई-नई कहानियां लिखती हैं।

     

    प्रश्न 7. वैसे तो नारी को अबला कहा जाता है, लेकिन वही नारी आ-बला क्यों बन जाती है?

    रमा बाई

    बी-425, हरि नगर,

    नई दिल्ली

    न अबला है

    न आ-बला है,

    वह संस्कृति है, कला है।

    पुरुष के आगे

    नहले पर दहला है,

    उसी के कारण जगत

    सुनहरा रुपहला है।

    फिर भी अगर वह स्वयं को

    अबला या आ-बला माने,

    तो अनाड़ी क्या जाने!

     

    wonderful comments!

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