अशोक चक्रधर > Blog > नारी के सवाल अनाड़ी के जवाब > नारी के सवाल अनाड़ी के जवाब

नारी के सवाल अनाड़ी के जवाब

नारी के सवाल अनाड़ी के जवाब 

प्रश्न 1. अनाड़ी जी, शादी की उम्र इक्कीस साल और मतदान की उम्र अठारह साल, ऐसा क्यों?

सुरुचि प्रिया

फ्लैट-4-ए,, सीताकुंज एपार्टमेंट,

लक्ष्मी ब्लॉक, प्रोफेसर कॉलोनी, करमटोली,

रांची-834008 (झारखण्ड)

 

ज़रूरत है नेशन से नेह की,

पहले देश की चिंता करो

फिर देह की!

पहले मतदान,

फिर वर-कन्यादान।

समझे जिजमान!!

 

 

प्रश्न 2. अनाड़ी जी, नारी की समाज में सामाजिक, आर्थिक, मानसिक और तार्किक स्थिति का ताना-बाना क्या है? इसका विश्लेषण करके बताइए, आख़िर नारीकौन से छोर पर है?

वीना साधवानी

3 गांधी नगर,

 अकोला-444004 (महा.)

नर हो या नारी

ताना-बाना जटिल है,

छोर गायब करने में

काल ही कुटिल है।

सारे दर्शन हो जाते हैं

व्यर्थ से,

जब समाज में

जुड़ जाते हैं अर्थ से।

होने लगता है बेड़ा गर्क

जब मन करने लगता है

ज़रूरत से ज़्यादा तर्क।

अगर मानवता से प्यार है,

तो छोर पकड़ने की

सम्भावना आधार है।

 

प्रश्न 3. अनाड़ी जी, टोने टोटकों को हमेशा झूठ और सच की कसौटी पर तोला जाता रहा है, लेकिन एक मां की ममता का इससे कोई वास्ता नहीं है। वह तो आज भीअपने बच्चे को नजर से, बुरी बला से, बचाने के लिए कई टोटके करती है, आपका क्या विचार है?

मधु मोदी

II-E 235, JNV कॉलोनी,

बीकानेर (राज.)

मोबाइल-09460072064

टोने और टोटके

समाज ने घुट्टी में पिलाए हैं

घोट के।

लेकिन टोटका नहीं है

नज़र का टीका,

उससे तो लगता है

बालक और भी नीका।

हर नज़र का ध्यान खींचता है,

हर दिल को ममता से सींचता है।

 

प्रश्न 4. अनाड़ी जी, समाज में निरंतर बढ़ते ही जा रहे हैं महिलाओं पर अत्याचार। ये कैसे और कब रुकेंगे, इस सवाल पर क्या हैं आपके विचार?

दिव्या  कौशिक

चन्दन सागर, वैल

बीकानेर-334001 (राज.)

मोबाइल-09667003743

अत्याचार रुकेंगे

जब मिलेगी

अत्याचारी को सज़ा,

पर न्याय भी लेने लगता है मज़ा।

दण्ड देने में

देर लगाता है,

और इस बीच

अत्याचारी अंधेर मचाता है।

 

प्रश्न 5. अनाड़ी जी, आप तो ज्ञान के खिलाड़ी लगते हैं, किसने आपको अनाड़ी नाम दिया?

माया रानी श्रीवास्तव

द्वारा-जयदेवी श्रीवास्तव

वासलीगंज, बरियाघाट रोड

मिर्जापुर-231001 (उ.प्र.)

ज्ञान आता है

दर-दर की घूल फांकने से,

बाहर की तांक-झांक के बजाए

अपने अन्दर झांकने से।

बिना दांव-पेच की

साफ-सुथरी नज़र,

जाए सीधे अन्दर।

नजर तिरछी हो न आड़ी,

ज्ञान के सारे खिलाड़ी

होते हैं अनाड़ी।

 

प्रश्न 6. अनाड़ी जी, वर्ष 2013 आने वाला है। इस नूतन वर्ष के लिए हमें शुभाशीष दीजिए और अपने शब्दों में 2013 को परिभाषित कीजिए?

पूजा राघव

X3700/2, Street No. 6

शांति मौहल्ला, गांधी नगर,

दिल्ली-110031

मोबाइल-9899374271

नया साल लाए

एक नूतन सवेरा,

सुख ही सुख हो घनेरा।

ये सन दो हजार तेरा,

सबका भला करे

न कि सिर्फ तेरा या मेरा।

 

प्रश्न 7. अनाड़ी जी, आज के युग में जब हर इंसान किसी न किसी तरह बुराइयों से जुड़ा है तो बुरा किसे कहा जाए, बुराई की परिभाषा क्या होनी चाहिए?

डॉ. सोनिका रस्तोगी

डी-2088, इन्दिरा नगर

लखनऊ-226016

बुराई दरसल

दूसरी बुराई की ऐसी माता है,

जिसे ममता करना

नहीं आता है।

कांटा दूसरे कांटे का ऐसा पिता है

जिसे समता करना नहीं आता है।

बुराई को पीड़ा नहीं पहुंचाता

भलाई की चीख निकलवाता है।

 

प्रश्न 8. अनाड़ी जी, मन्दिर में पुजारी पुरुष ही क्यों होते हैं, स्त्री क्यों नहीं?

अंजू अग्रवाल

अग्रवाल मेडिकल स्टोर

मेन बाजार, पोस्ट-धनपुरी-484114

जिला-शहडोल (म.प्र.)

मोबाइल-07652-250349

बच्चे पालने से लेकर

घर को हर संकट से

निकालने तक

स्त्री के पास

हज़ारों काम हैं,

सुबह और शाम हैं।

पुरुष फालतू है

इसीलिए

भगवान जी का पालतू है।

 


Comments

comments

Leave a Reply