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    नागार्जुन पर संगोष्ठी के बाद

    (हमारे कुछ तथाकथित महानों का वाग्विलास)

     

    नागार्जुन पर

    सफल संगोष्ठी के बाद

    मैखाना हुआ आबाद।

     

    पहले पैग के बाद

    ग़रीबी का गौरवीकरण हुआ।

    दूसरे के बाद क़रीबी का

    कौरवीकरण हुआ।

     

    पहले पैग ने पहले को

    ऐश में ला दिया,

    लेकिन तीसरे पैग ने

    तीसरे को तैश में ला दिया।

    अरे, अरे, अरे!

    क्या कोई तभी महान है

    जब भूखा मरे।

     

    चौथे पैग के बाद महाभारत हुआ

    लड़खड़ाते विचारों के बीच,

    पांचवे ने तैयार करी

    गुत्थमगुत्था की कीच।

    कोई अज्ञेय

    कोई केदार

    कोई शमशेर हो गया,

    जिसने छठा पैग लिया

    वो वहीं ढेर हो गया।

     

    सातवें पैग के बाद भी

    एक समीक्षक

    सधे हुए स्वर में बोले,

    बोले क्या

    उन्होंने कविता के रहस्य खोले–

     

    जब भरे पेट में भी

    भूख जाग जाती है,

    तब कविता भाग जाती है।

    चलो साथियो आओ

    इस गिरे हुए कवि को उठाओ।

     

     

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