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मील के पत्थर कैसे बांचूं?

20110215 meel ke pathar kaise banchuबिटिया के लिए सच्चा दहेज शिक्षा ही तो है

रोको, रोको!

ये डोली मेरी

कहां चली?

छूटा गांव छूटी गली!

 

रोक ले बाबुल,

दौड़ के आजा,

बहरे हुए कहार,

अंधे भी हैं ये,

इन्हें न दीखें,

तेरे मेरे

अंसुओं की धार।

रोको, रोको!

ये डोली मेरी

कहां चली?

छूटा गांव छूटी गली!

 

कपड़े सिलाए

गहने गढ़ाए,

दिए तूने

मखमल थान,

बेच के धरती,

खोल के गैया,

बांधा तूने सब सामान,

दान दहेज

सहेज के सारा,

राह भी दी अनजान,

मील के पत्थर

कैसे बांचूं,

दिया न अक्षर-ज्ञान।

गिरी है

मुझ पर बिजली।

छूटा गांव छूटी गली।

 

रोको, रोको!

ये डोली मेरी

कहां चली?

छूटा गांव छूटी गली!

 

 


Comments

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3 Comments

  1. Bahut badhiya 🙂

  2. Anjanil kashyap verma |

    Kya baat hai…Chakradhar Sir…”yahi hai bifal Sarkar,…hai nahi unke pas Chakradhar,…samaj le samaj samay ki pukar,…albatta parengi samay ki maar,…Ab to kaho Bitiya unhe khabardar,…De tumhe Shiksha ka barabar adhikar,…gaon gaon kahe Hosiyar..hosiyar,…Bitiyahi to hai samaj ka Adhaar,..kya baat hai Chakradhar Sir..

  3. sunita patidar |

    dan dahej ke karan kitni betiya mar dee jati hai lekin dehre dehre siksa ka persenteg bad raha hai.

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