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ममते! अश्रु नहीं अब थमते!

mamte ashru naheen ab thamate

 

 

 

 

 

 

 

 

ममते! अश्रु नहीं अब थमते!

(रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी का करुणा-क्रन्दन)

 

ममते!

अश्रु नहीं अब थमते!!

ममते!

अश्रु नहीं अब थमते!!

 

तुमने हमको गोली दे दी,

सबके आगे छाती भेदी।

जिस पटरी पर दौड़ाया था,

उस पटरी पर कटा त्रिवेदी।

 

भूल गए अब वात्सल्य की

गोदी में बस हम थे!

ममते!

अश्रु नहीं अब थमते!!

 

जिनको तुमने पाला पोसा

जिन पर तुमने किया भरोसा।

एक तुम्हारा इंगित पाकर

वे दे गए मौत का टोसा।

तुमसे कुछ थे, हम से कुछ, वे

सहयोगी ही यम थे!

ममते!

अश्रु नहीं अब थमते!!

 

हमरी रही भूल भी नाहीं,

हमरे लिए रूल भी नाहीं,

संसद के बरगद के अब हम

तृण भी नहीं मूल भी नाहीं।

 

नई भूमि पर वक़्त लगेगा

फिर से जमते जमते!

ममते!

अश्रु नहीं अब थमते!!

 

कहां जायगा पता नहीं, ये

जोगी रमते रमते!

ममते!

अश्रु नहीं अब थमते!!

 


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