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मानती हूं आप सत्यवादी हैं

maanatee hoon aap satyavaadee hain

 

 

 

 

 

 

 

 

मानती हूं आप सत्यवादी हैं

(पुरुष को बहुत गहराई तक समझती है स्त्री)

 

आप बहुत झूठ बोलते हैं बनवारी!

 

बनवारी बोले— नहीं प्यारी!

मैं कर सकता हूं

ज़माने के आगे मुनादी,

कि मुझ जैसा

नहीं मिलेगा सत्यवादी।

 

पत्नी बोलीं— जानती हूं, जानती हूं,

आप सत्यवादी हैं

सच्चे दिल से मानती हूं।

आप सत्य बोलते हैं तब

जब पलकें झपकाते हैं,

आप सत्य बोलते हैं तब

जब सिर को ज़रा नीचे झुकाते हैं।

आप सत्य बोलते हैं तब

जब खोपड़ी को तर्जनी से खुजाते हैं,

आप सत्य बोलते हैं तब

जब अनजाने मेज़ पर

तबला सा बजाते हैं।

आप सत्य बोलते हैं तब

जब अपने आप से हारते हैं,

आप सत्य बोलते हैं तब

जब छत को एकटक निहारते हैं।

आप सत्य बोलते हैं तब

जब निरर्थक नैन मटकाते हैं,

आप सत्य बोलते हैं तब

जब बैठे-बैठे उंगलियां चटकाते हैं।

 

बनवारी बोले—

बात को ज़्यादा मत घुमाइए,

सत्य कब नहीं बोलते बताइए?

 

पत्नी ने उत्तर दिया—

मुझसे मत करिए असत्य की आशा,

जानती हूं आपके शरीर की भाषा।

आप सत्य तब नहीं बोलते हैं,

जब मुंह खोलते हैं!


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