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    लड़ाई का पहला क़दम

    (हम यदि सभ्य और प्रबुद्ध हैं तो युद्ध क्यों करते हैं)

     

     

    अब जब

    विश्वभर में सबके सब,

    सभ्य हैं, प्रबुद्ध हैं

    तो क्यों करते युद्ध हैं?

     

    कैसी विडंबना कि

    आधुनिक कहाते हैं,

    फिर भी देश लड़ते हैं

    लहू बहाते हैं।

     

    एक सैनिक दूसरे को

    बिना बात मारता है,

    इससे तो अच्छी

    समझौता वार्ता है।

     

    एक दूसरे के समक्ष,

    बैठ जाएं दोनों पक्ष।

    बातचीत से हल निकालें,

    युद्ध को टालें!

    क्यों श्रीमानजी,

    आपका क्या ख़याल है?

    श्रीमानजी बोले—

    यही तो मलाल है।

     

    दोनों पक्षों के पास

    अपने-अपने तर्क हैं,

    दोनों अपने हित में

    ज़रूरत से ज़्यादा सतर्क हैं।

     

    डिप्लोमैटिक भाषा

    डिप्लोमैट को खलेगी,

    बातचीत होगी

    पर हर बार टलेगी,

     

    बातचीत से कुछ होगा

    आपका भरम है,

    दरअसल, ये बातचीत ही तो

    लड़ाई का पहला क़दम है।

    wonderful comments!

    1. Pramod Shukla सितम्बर 5, 2012 at 7:57 अपराह्न

      Kya baat hai Ashok ji !

    2. Pramod Shukla सितम्बर 5, 2012 at 7:57 अपराह्न

      Kya baat hai Ashok ji !

    3. Pramod Shukla सितम्बर 5, 2012 at 7:57 अपराह्न

      Kya baat hai Ashok ji !

    4. अविनाश वाचस्पति मुन्नाभाई सितम्बर 5, 2012 at 8:04 अपराह्न

      कदम दमदार होता है

    5. अविनाश वाचस्पति मुन्नाभाई सितम्बर 5, 2012 at 8:04 अपराह्न

      कदम दमदार होता है

    6. अविनाश वाचस्पति मुन्नाभाई सितम्बर 5, 2012 at 8:04 अपराह्न

      कदम दमदार होता है

    7. Upasana Singh सितम्बर 6, 2012 at 4:03 पूर्वाह्न

      hum prabudh to hein, per ekadhikar chahtein hein. aur ahnkar jo sabhi par adhipatya chahta.

    8. Upasana Singh सितम्बर 6, 2012 at 4:03 पूर्वाह्न

      hum prabudh to hein, per ekadhikar chahtein hein. aur ahnkar jo sabhi par adhipatya chahta.

    9. Upasana Singh सितम्बर 6, 2012 at 4:03 पूर्वाह्न

      hum prabudh to hein, per ekadhikar chahtein hein. aur ahnkar jo sabhi par adhipatya chahta.

    10. Vijay Tyagi सितम्बर 9, 2012 at 1:22 पूर्वाह्न

      Guru ji pranaam, Sikandar ho Hitlar ya apna Ashok Baad Yuddh sabhi kyun manaate hai shok Tinka b yahaan(Dharti)se na le ja sakte hai log Jug Muththi me karne ka lekin,paale hai rog......

    11. Srikant Kekare अक्टूबर 13, 2012 at 10:28 अपराह्न

      कविता में शब्द जरुर कम हैं लेकिन दरअसल बात में दम है जब अंतर्मन में छिड़ी विचारों की लड़ाई तब बात मेरी समझ में आई एक अशोक वो था शांति का पक्षधर एक अशोक ये है - अशोक चक्रधर इनके विचारों पर विचार करें तो काहे को इतने सैनिक मरें पर जैसा आपने कहा बातचीत से हल निकलता नहीं युद्ध टाले टलता नहीं बातचीत का मुद्दा सिर्फ इसमें निहित है कि हम बात वही मानेंगे जिसमे पहले हमारा हित है।

      1. mani मार्च 19, 2013 at 11:38 अपराह्न

        aap b kam nhi hai boss maan gye aapki baat ki nazar

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