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  • किधर गईं बातें कहां गईं बातें?

    kidhar gaee baaten, kahaan gaee baaten

     

     

     

     

     

     

     

     

     

    किधर गईं बातें कहां गईं बातें?

    (युवा-युगल की आत्मीय संवाद-लीला)

     

    उसने कहा—

    चलो!

    इसने कहा—

    ना!

    उसने कहा—

    तुम्हारे लिए ख़रीदभर बाज़ार है।

    इसने कहा—

    बंद!

    उसने पूछा—

    क्यों?

    इसने कहा—

    मन!

    उसने कहा—

    न लगने की क्या बात है?

    इसने कहा—

    बातें करेंगे यहीं!!

    उसने कहा

    नहीं, चलो कहीं!

    अब वह झुंझलाई—

    क्या-आ-आ है?

    उसने कहा—

    शर्ट ख़रीदनी है अपने लिए!

     

    चल दी जी, चल दी

    वो ख़ुशी-ख़ुशी जल्दी।

    फिर चलती रहीं चलती रहीं

    चलती रहीं बातें

    यहां की, वहां की

    इधर की, उधर की।

    इसकी, उसकी

    जाने किस-किस की।

     

    कि एकाएक

    सिर्फ़ इसकी आंखों को देखा उसने

    इसने देखा उसका देखना।

    और. . .तो फिर. . .

    किधर गईं बातें?

    कहां गईं बातें?

     

     

     

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