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क्या किया उन फ़ोटोज़ का

kayaa kiyaa un photoz kaa

 

 

 

 

 

 

 

 

क्या किया उन फ़ोटोज़ का?

(पुलिस विभाग की कर्मठता पर संदेह न करें)

 

सामने खड़ा था स्टा़फ़ समूचा

आई. जी. ने रौब से पूछा—

शातिर बदमाशों के

पांच फोटो मैंने भेजे,

कुछ किया

या सि़र्फ सहेजे?

इलाक़े में

हो रही हैं वारदातें,

क्या कर रही है पुलिस

सो रही है पुलिस

ये होती हैं बातें।

रोज़मर्रा ज़िंन्दगी में

बढ़ रहे हैं ख़तरे,

और खुलेआम

घूम रहे हैं जेबकतरे।

चोरी, डकैती

सेंधमारी, जेबकतरी

सिलसिला बन गया है रोज़ का,

क्या किया उन फ़ोटोज़ का?

सिर झुकाए खड़ा था

स्टा़फ़ सारा,

आई. जी. ने हवा में

बेंत फटकारा—

कोई जवाब नहीं दिया,

बताइए

बताइए

उन फ़ोटोज़ का क्या किया?

इस तरह

सिर मत झुकाइए।

क्या किया है

बताइए।

वो उचक्के

पूरे शहर को मूंड रहे हैं…..

 

एक थानेदार बोला—

सर!

तीन फ़ोटो मिल गए हैं

दो फ़ोटो ढूंढ रहे हैं।

 

 


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