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कैसे पकड़ा गया दूसरा शेर

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कैसे पकड़ा गया दूसरा शेर

(ज़रा सी चूक हुई नहीं कि किसी छोटे की खोज में बड़ा पकड़ में आ जाता है)

 

राष्ट्रीय पशु उद्यान से दो शेर भागे,
गार्ड ज़रा देर से जागे।
एक शेर कुछ घंटे में ही पकडा़ गया,
लेकिन दूसरा दो महीने बाद

जंज़ीरों में जकडा़ गया।

दोनों को डाल दिया सुरक्षा घेरे में,
पहले ने दूसरे से पूछा अंधेरे में–
खूंखार मनुष्यों का जंगल!
कैसा रहा तेरा भूख के साथ दंगल?

दूसरा बोला– दौड़ते दौड़ते
पहुंच गया था राजघाट मैं,
वहां पूरे दो महीने बिताए ठाठ में।
चारों तरफ़ थे बगीचे,
मैं छिप गया एक मंच के नीचे।
अनशन प्रदर्शन के लिए लोग आते थे,
माइक पर क्रोध और विरोध में

गला फाड़-फाड़ के चिल्लाते थे।

थक कर जैसे ही कोई
आंख मींच लेता था,
मैं एक झटके में
उसे नीचे खींच लेता था।
बड़ी सफाई से काम चलाता था,
ज़रूरत से ज़्यादा नहीं खाता था।
तो मैं भूख मिटाता रहा ऐसे!

पहले ने पूछा–
फिर पकडा़ गया कैसे?

उत्तर मिला–
एक दिन भरा हुआ था पूरा ग्राउंड,
अचानक बंद हो गई साउंड!
कयोंकि मैंने

तोड़कर तारों के जाले को,
नीचे खींच लिया था
साउंड स्लीप में बैठे
साउंड वाले को।

 

 


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