मुखपृष्ठ>
  • खिली बत्तीसी
  • >
  • जीवन-साथी की तलाश का युगल-गीत
  • जीवन-साथी की तलाश का युगल-गीत

    jeevan saathee kee talaash kaa yugal geet

     

     

     

     

     

     

     

     

    जीवन-साथी की तलाश का युगल-गीत

    (किसके लिए… किसके लिए? मेरे लिए… मेरे लिए!)

     

    मन ये करे, स्वैटर बुनूं,

    साइज़ हो क्या… किसको चुनूं?

    किसके लिए मैं स्वैटर बुनूं?

    कोई ऐसा हो, मेरे जैसा हो,

    शायद ऐसा हो, काश ऐसा हो!

    किसके लिए… किसके लिए?

     

    मेरे लिए… मेरे लिए!

     

    हम दोनों हों और कैरम हो,

    फिर चाहे कोई भी मौसम हो।

    वो जब कहे संग मैं खेलूं

    क्वीन वो ले कवर मैं लूं,

    जीते वही, खुश मैं हो लूं।

    किसके लिए… किसके लिए?

     

    मेरे लिए… मेरे लिए!

     

    उसकी बाहों में मेरी बाहें हों,

    मेरी सांसों में उसकी सांसें हों।

    कुछ वो कहे, कुछ मैं कहूं,

    उसके लिए हर दुख सहूं,

    फिर भी सदा हंसती रहूं।

    किसके लिए… किसके लिए?

     

    मैं भी तो हूं, मुझको चुनो,

    सबसे मैं हूं, बैटर, यु नो!

    मेरे लिए स्वैटर बुनो!

    कैरम खेलो, सब सुख ले लो।

    मैं आ गया, देखो ये लो!

    हां मैं ऐसा हूं, तेरे जैसा हूं।

    जैसा चाहे तू, बिल्कुल वैसा हूं।

     

    क्या तू ऐसा, मेरे जैसा है?

    हां तू ऐसा है, शायद ऐसा है!

    चल तेरे लिए… तेरे लिए?

     

    सच्ची, मेरे लिए… मेरे लिए!!

     

    wonderful comments!

    1. Vishwat Sen अप्रैल 10, 2012 at 7:12 अपराह्न

      जीवन साथी आखिर साथी है। साथ निभाने का शायद एक जुनून। भला हो या बुरा, दु:ख हो या सुख, हर कंडीशन में कदम दर कदम ताल मिलाने का जुनून। जीवन साथी तो आखिर जीवन साथी है। सधन्‍यवाद और आभार आपका विश्‍वत सेन समाचार संपादक इतवार नई दिल्‍ली।

    2. वीरेश अरोड़ा " वीर" अप्रैल 15, 2012 at 4:38 अपराह्न

      आपकी रचनाओ का वर्षो से कायल हूँ. टिप्पणी देने के काबिल तो नहीं हूँ लकिन इतना तो कह ही सकता हूँ.............बेहतरीन ...

    प्रातिक्रिया दे

    Receive news updates via email from this site